जी.एन.ए. यूनिवर्सिटी में पतंजलि योगपीठ एवं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का विशेष योग अभ्यास एवं योग ज्ञान समारोह
फगवाड़ा— आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां पढ़ाई, काम और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव ने युवा पीढ़ी की जीवनशैली को प्रभावित किया है, वहीं योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि मन और जीवनशैली में संतुलन लाने का प्रभावी साधन बनकर सामने आया है। जरूरत इस बात की है कि योग को केवल किसी विशेष दिन या कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए। इसी उद्देश्य के साथ पतंजलि योगपीठ एवं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की ओर से जी.एन.ए. यूनिवर्सिटी के सहयोग से यूनिवर्सिटी परिसर में विशेष योग अभ्यास एवं योग ज्ञान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में पतंजलि योगपीठ के योग गुरु एवं राज्य प्रभारी राजिंदर शिंगारी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करते हुए विद्यार्थियों एवं उपस्थित गणमान्यों को विभिन्न योगासन एवं योग अभ्यास करवाए। समारोह के प्रबंध जी.एन.ए. यूनिवर्सिटी के शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रमुख डॉ. सुरिंदर माही एवं उनकी टीम द्वारा किए गए। डॉ. माही ने मुख्य वक्ता राजिंदर शिंगारी का स्वागत करते हुए उन्हें सम्मान चिह्न भेंट किया। इसके बाद यूनिवर्सिटी की छात्रा किरण प्रजापति ने सुंदर योग प्रदर्शन प्रस्तुत कर समारोह का शुभारंभ किया।
योग शरीर ही नहीं, सोच और जीवनशैली को भी बदलता है : योग गुरु राजिंदर शिंगारी

योग गुरु राजिंदर शिंगारी ने विद्यार्थियों को विभिन्न योगासन करवाने के साथ योग के शारीरिक एवं मानसिक लाभों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने नियमित योग अभ्यास को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए विद्यार्थियों को इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित किया। समारोह के दौरान नियमित योग अभ्यास करने वाले प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि लगातार योग करने से उनके स्वास्थ्य, दिनचर्या और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
नंद सोनी बोले—युवाओं को योग से जोड़ना समय की जरूरत
पतंजलि योगपीठ के तहसील प्रभारी नंद सोनी ने कहा कि समारोह का उद्देश्य केवल योगासन करवाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों एवं आम लोगों को योग के वास्तविक महत्व के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली में शारीरिक सक्रियता कम होने और मानसिक दबाव बढ़ने के कारण योग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी जीवन से ही योग को दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो स्वस्थ शरीर के साथ सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली का निर्माण भी संभव है। योग को बीमारी आने के बाद उपचार के विकल्प के रूप में देखने के बजाय स्वस्थ जीवन जीने की नियमित आदत के रूप में अपनाने की जरूरत है। नंद सोनी ने कहा कि पतंजलि योगपीठ एवं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का प्रयास है कि योग का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और विशेष रूप से युवा वर्ग इससे जुड़े। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं योग अपनाने के साथ अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
संस्थाओं के सहयोग से आगे बढ़ेगा योग का संदेश
समारोह के समापन पर पतंजलि योगपीठ की पूरी टीम की ओर से जी.एन.ए. यूनिवर्सिटी के कुलपति गुरदीप सिहरा, उपकुलपति प्रो. (डॉ.) हेमंत शर्मा, रजिस्ट्रार डॉ. कुणाल बैंस, अकादमिक मामलों की डीन डॉ. मोनिका हंसपाल एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रमुख डॉ. सुरिंदर माही सहित पूरी यूनिवर्सिटी टीम का सहयोग एवं सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के जिला प्रभारी दीपक खोसला, तहसील प्रभारी अशोक शर्मा, पतंजलि योगपीठ के तहसील प्रभारी नंद सोनी, जी.एन.ए. यूनिवर्सिटी से डॉ. पवंदीप, डॉ. अर्पित, डॉ. सुरेश, सविता, तिलक राज एवं रेनू चौधरी के अलावा पंडित अनिल भारद्वाज, शरणजीत कौर, चंचल सेठ, सुमन शर्मा, सरबजीत, राजिंदर करवल, चमन कंडा, हिमांशु आनंद, विक्की, रणजीत कुमार, सतीश बंटी एवं बलविंद्र सैनी सहित यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी एवं योग प्रेमी उपस्थित थे।
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