हाईवे जाम, भारी पुलिस तैनाती और हिंसा के बीच क्या फगवाड़ा से गुजरेगी BJP की यात्रा; 30 सितंबर को जालंधर में अमित शाह की रैली
फगवाड़ा। LPU में शनिवार देर रात शुरू हुआ छात्रों का विरोध रविवार को दिनभर जारी रहा और यूनिवर्सिटी परिसर से निकलकर जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया। सोशल मीडिया पर एक छात्रा से कथित दुष्कर्म और उसके बाद आत्महत्या से जुड़ी सूचना फैलने के बाद रात करीब 2 बजे बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए। इसके बाद यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ और कुछ जगह आगजनी की खबरें सामने आईं तथा छात्रों ने हाईवे जाम कर दिया। पुलिस की भारी तैनाती के बावजूद दिनभर छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा और दोपहर बाद भी छात्रों की ओर से हाईवे पर दोबारा प्रदर्शन किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। रविवार दोपहर तक छात्रों का विरोध और हाईवे जाम जारी था, जबकि पुलिस ने मामले की जांच के लिए SIT गठित कर दी है।

दावा क्या था, पुलिस और यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?
घटनाक्रम की शुरुआत जिस सूचना से हुई, उसमें दावा किया गया कि गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म हुआ और बाद में उसकी आत्महत्या की बात सामने आई। कुछ छात्रों ने मीडिया से बातचीत में कथित तौर पर किसी बाहरी कर्मचारी के इसमें शामिल होने की बात कही, जबकि कई छात्र खुद भी कथित पीड़िता की पहचान या घटना के प्रत्यक्ष विवरण के बारे में निश्चित जानकारी नहीं दे सके। दूसरी तरफ कपूरथला पुलिस के अधिकारियों ने शुरुआती स्तर पर कहा कि उन्हें ऐसी घटना की कोई शिकायत नहीं मिली थी और सोशल मीडिया पर चल रही सूचना की जांच की जा रही थी। बाद में छात्रों के बयान के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की गई और जालंधर रेंज के DIG नवीन सिंगला ने बताया कि CCTV, फोरेंसिक और फोन डेटा की जांच के लिए SIT बनाई गई है। यानी FIR दर्ज होना आरोप की जांच शुरू होने का संकेत है, आरोप की पुष्टि नहीं। LPU प्रबंधन ने दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाओं को पूरी तरह गलत, बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया है। यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से ऐसी सूचनाएं फैला रहे हैं, जिससे छात्रों में भ्रम पैदा हो रहा है और यूनिवर्सिटी के शांतिपूर्ण अकादमिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यूनिवर्सिटी ने छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों से केवल आधिकारिक माध्यमों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से कहा गया कि शुरुआत में विरोध शांतिपूर्ण था, लेकिन जब उन्हें लगा कि उनकी शिकायतों को पर्याप्त रूप से नहीं सुना जा रहा, तब स्थिति बिगड़ती चली गई। कुछ छात्रों ने कैंपस में बाहरी कर्मचारियों की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
हाईवे पर घंटों जाम, पुलिस की भारी तैनाती

LPU का मामला इसलिए भी बड़ा हो गया क्योंकि विरोध केवल यूनिवर्सिटी परिसर तक सीमित नहीं रहा। छात्रों के हाईवे पर पहुंचने के बाद जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों की लंबी कतारें लगने की खबरें सामने आईं। पुलिस की बड़ी संख्या में तैनाती की गई और अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर स्थिति संभालने का प्रयास किया। रिपोर्ट के अनुसार छात्रों ने बाद में FIR की प्रति और मामले में कार्रवाई की जानकारी की मांग करते हुए दोबारा हाईवे पर प्रदर्शन किया। समाचार लिखे जाने तक प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त होने की कोई विश्वसनीय आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई थी।
चितकारा के बाद LPU, पुलिस अब दोनों घटनाओं को भी देख रही है
LPU का बवाल उस घटनाक्रम के करीब 24 घंटे बाद सामने आया, जब राजपुरा की चितकारा यूनिवर्सिटी में भी छात्राओं से जुड़ी अपुष्ट सोशल मीडिया सूचनाओं के बाद छात्रों का विरोध हिंसक हो गया था। वहां दो छात्राओं के कथित रूप से लापता होने या आत्महत्या करने की बातें फैली थीं, लेकिन पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने ऐसी मौत की पुष्टि नहीं की थी। अब पंजाब पुलिस ने दोनों विश्वविद्यालयों में हुई हिंसा के कारणों की जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार Special DGP Law & Order परवीन कुमार सिन्हा ने बताया कि दोनों घटनाओं को फिलहाल अलग-अलग माना जा रहा है, लेकिन पुलिस संभावित कारणों और दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की संभावना को भी जांच रही है। यानी फिलहाल आधिकारिक स्थिति यह नहीं है कि दोनों घटनाएं जुड़ी हुई हैं, लेकिन जांच में इस पहलू को पूरी तरह बाहर भी नहीं रखा गया है।
इसी बीच फगवाड़ा में BJP की नशामुक्त पंजाब यात्रा
अब इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू सामने आता है। BJP ने 18 सितंबर से पंजाब में चार ‘नशामुक्त पंजाब यात्राएं’ शुरू की हैं, जिनका घोषित उद्देश्य राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचना और नशे के खिलाफ अभियान चलाना है। BJP की दूसरी यात्रा के घोषित रूट में फगवाड़ा भी शामिल है और चारों यात्राओं का समापन 30 सितंबर को जालंधर में प्रस्तावित है। इसी समापन कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली होनी है। यह कार्यक्रम 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले BJP के चुनावी अभियान की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है। रैली के लिए जालंधर-फगवाड़ा हाईवे के पास स्थल तय किया गया है और बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में 27 सितंबर को LPU के बाहर उसी क्षेत्र में घंटों का हाईवे जाम, 28 सितंबर के आसपास फगवाड़ा से जुड़ी BJP की नशामुक्त यात्रा और उसके दो दिन बाद 30 सितंबर को जालंधर-फगवाड़ा हाईवे क्षेत्र में अमित शाह की बड़ी रैली—इन तारीखों की नजदीकी अब चर्चा का हिस्सा बन गई है। BJP की ओर से यात्रा को नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान बताया जा रहा है, जबकि राजनीतिक रिपोर्टों में इसे 2027 के चुनावी अभियान के संदर्भ में भी रखा गया है। इन घटनाओं के बीच किसी राजनीतिक संबंध का कोई आधिकारिक प्रमाण अभी सामने नहीं आया है।
सरकार की तरफ से सार्वजनिक बयान का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम का एक और पहलू राज्य सरकार की प्रतिक्रिया से जुड़ा है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में पुलिस अधिकारियों के बयान, SIT के गठन, FIR, यूनिवर्सिटी प्रबंधन की प्रतिक्रिया और छात्रों की मांगें सामने आई हैं, लेकिन समाचार लिखे जाने तक पंजाब सरकार की ओर से LPU में हुई हिंसा, हाईवे जाम और लंबे चले छात्र विरोध पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान नहीं मिला। यह बात इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि मामला अब केवल यूनिवर्सिटी परिसर का नहीं रहा; राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ, बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात हुआ और घटना राष्ट्रीय मीडिया में पहुंच गई। ऐसे में सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था, छात्रों की शिकायतों की जांच और हिंसा के संबंध में कोई औपचारिक सार्वजनिक रुख सामने आता है या नहीं, यह भी घटनाक्रम का हिस्सा बना हुआ है। यहां सवाल सरकार की किसी भूमिका का निष्कर्ष निकालने का नहीं, बल्कि इतने बड़े कानून-व्यवस्था के घटनाक्रम पर उसकी सार्वजनिक प्रतिक्रिया को दर्ज करने का है।
टाइमिंग क्या सिर्फ टाइमिंग है?
LPU में रात से चला छात्र विरोध, हाईवे पर घंटों का जाम, भारी पुलिस तैनाती, उससे एक दिन पहले चितकारा यूनिवर्सिटी में हुआ समान प्रकृति का छात्र बवाल और इसी बीच फगवाड़ा-जालंधर क्षेत्र में BJP की नशामुक्त यात्रा तथा 30 सितंबर की अमित शाह रैली—इन सभी घटनाओं को अलग-अलग देखा जाए तो प्रत्येक की अपनी वजह और अपनी जांच है। लेकिन जब इनकी तारीखें और स्थान एक साथ सामने रखे जाते हैं, तो सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा होना स्वाभाविक है कि क्या यह महज घटनाओं का संयोग है या आने वाले दिनों में जांच से कोई दूसरी कड़ी सामने आएगी। अभी पुलिस भी दोनों विश्वविद्यालयों की घटनाओं के संभावित कारणों और किसी संभावित संबंध की जांच कर रही है। इसलिए फिलहाल किसी राजनीतिक साजिश का निष्कर्ष निकालने के बजाय इतना ही कहा जा सकता है कि LPU का यह घटनाक्रम ऐसे समय और ऐसे स्थान पर हुआ है, जहां अगले कुछ दिनों में BJP का बड़ा राजनीतिक अभियान भी अपने चरम पर पहुंचने वाला है। इसे महज इत्तेफाक माना जाए या इसके पीछे कोई और संदर्भ निकलकर सामने आए, फिलहाल इसका जवाब जांच के पास है।
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