विजय सांपला और सोम प्रकाश का साथ दिखना बना शहर की सियासत का सबसे दिलचस्प दृश्य — क्या बदलेगा फगवाड़ा भाजपा का राजनीतिक मंच?
फगवाड़ा। भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ मंगलवार को फगवाड़ा पहुंची तो मंच से नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया, लेकिन इस पूरे आयोजन में एक ऐसा राजनीतिक दृश्य भी सामने आया जिसने शहर की सियासत में अलग ही चर्चा छेड़ दी।
यात्रा के मंच पर फगवाड़ा भाजपा के दो बड़े चेहरे—पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला और पूर्व केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश—एक साथ नजर आए।
यही इस आयोजन की वह तस्वीर रही, जो सामान्य यात्रा की खबर से कहीं आगे निकल गई। विजय सांपला पंजाब भाजपा के प्रमुख दलित चेहरों में रहे हैं। वह 2014 में होशियारपुर से लोकसभा सांसद चुने गए और केंद्र में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रहे। इसके बाद वह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन भी बने। दूसरी ओर, सोम प्रकाश का फगवाड़ा की राजनीति से सीधा और लंबा रिश्ता रहा है। पूर्व IAS अधिकारी सोम प्रकाश फगवाड़ा से दो बार विधायक रहे और 2019 में होशियारपुर से लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद केंद्र में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री बने।
एक मंच, लेकिन सवाल सिर्फ नशा मुक्ति का नहीं
राजनीति में मंच केवल मंच नहीं होता। कौन किसके साथ खड़ा है, किस मौके पर खड़ा है और तस्वीर में कौन-कौन साथ दिखाई देता है—इन सबका अपना राजनीतिक संदेश होता है। फगवाड़ा में मंगलवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ का घोषित उद्देश्य नशे के खिलाफ जन-जागरूकता पैदा करना है। लेकिन स्थानीय राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस कार्यक्रम में सांपला और सोम प्रकाश की मौजूदगी ने आयोजन को एक अतिरिक्त राजनीतिक अर्थ दे दिया। फगवाड़ा भाजपा की राजनीति में दोनों नेताओं का अपना-अपना प्रभाव और राजनीतिक इतिहास रहा है। ऐसे में दोनों का एक ही मंच पर साथ दिखाई देना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया।
क्या यह सिर्फ कार्यक्रम था या कोई राजनीतिक संकेत?
इस तस्वीर को लेकर फिलहाल किसी तरह का राजनीतिक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। दोनों नेताओं का एक कार्यक्रम में साथ आना अपने आप में किसी नई राजनीतिक व्यवस्था या रणनीति की घोषणा नहीं है। लेकिन सवाल यह जरूर है कि 2027 की ओर बढ़ते पंजाब के राजनीतिक माहौल में भाजपा अपने पुराने और प्रभावशाली चेहरों को किस तरह एक मंच पर ला रही है? नशा मुक्ति जैसे व्यापक सामाजिक मुद्दे पर शुरू की गई यात्रा ने फगवाड़ा में कम से कम इतना जरूर दिखा दिया कि भाजपा के अलग-अलग बड़े चेहरों को एक ही राजनीतिक मंच पर देखा जा सकता है। और यही तस्वीर शायद मंगलवार की इस यात्रा की सबसे अलग कहानी बन गई।
फगवाड़ा की राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं के अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र रहे हैं। ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह सिर्फ एक कार्यक्रम की साझा तस्वीर थी या आने वाले समय में फगवाड़ा भाजपा के भीतर बड़े नेताओं की राजनीतिक मौजूदगी और समन्वय का कोई नया अध्याय दिखाई देगा? फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है— ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ का एजेंडा नशे के खिलाफ था, लेकिन फगवाड़ा में इस यात्रा ने भाजपा के दो दिग्गजों को एक फ्रेम में लाकर स्थानीय सियासत में एक अलग ही सवाल खड़ा कर दिया। भाजपा की ओर से पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने के उद्देश्य से ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ निकाली जा रही है जो कि 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की विशाल रैली से समाप्त होगी।
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