दो पंचायत सदस्यों ने ‘आप’ में शामिल होने की खबर का किया खंडन, कहा—कांग्रेस के वफादार सिपाही हैं और रहेंगे, डरा-धमकाकर या ग्रांटें रोककर पंचायतों को ‘आप’ में शामिल करवाने से कुछ हासिल नहीं होगा : धालीवाल
फगवाड़ा। गांव पांछट की पंचायत के सांसद डॉ. राज कुमार चब्बेवाल के समर्थन में खड़े होने की खबर के बाद फगवाड़ा की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर नया मोड़ सामने आया है। मीडिया में प्रकाशित खबर में पंचायत के कई सदस्यों के नामों का उल्लेख किया गया था। अब पंचायत के दो सदस्यों इंदरजीत सिंह और मीनाक्षी ने सामने आकर स्पष्ट किया है कि वे कांग्रेस पार्टी के साथ हैं और उन्होंने आम आदमी पार्टी में शामिल होने का कोई फैसला नहीं किया है। पांछट पंचायत के समर्थन संबंधी खबर में इंदरजीत सिंह और मीनाक्षी के नाम भी शामिल थे। फगवाड़ा के विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल की मौजूदगी में इंदरजीत सिंह और मीनाक्षी ने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी के वफादार सिपाही हैं और कांग्रेस में ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो कांग्रेस छोड़ी है और न ही आम आदमी पार्टी में शामिल हुए हैं। दोनों ने दावा किया कि उनके नाम उनकी सहमति के बिना राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल किए गए हैं और AAP में शामिल होने संबंधी खबर उनके संबंध में बेबुनियाद है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सांसद डॉ. राज कुमार चब्बेवाल की फगवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ी हुई है। लेकिन अब कहानी का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। इंदरजीत सिंह और मीनाक्षी के इस खंडन से पांछट पंचायत को लेकर सामने आए राजनीतिक दावे पर सवाल खड़े हुए हैं। दोनों पंचायत सदस्यों ने साफ कहा कि उनकी राजनीतिक निष्ठा कांग्रेस के साथ है और वे कांग्रेस में ही बने रहेंगे।
इस मौके पर विधायक एवं पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी बलविंदर सिंह धालीवाल ने कहा कि पंचायतों और उनके सदस्यों को डराकर, दबाव बनाकर या विकास कार्यों की ग्रांटें रोकने की धमकी देकर किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल करवाने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी राजनीतिक पसंद और विचारधारा के अनुसार फैसला लेने का अधिकार है। धालीवाल ने कहा कि किसी पंचायत सदस्य की सहमति के बिना उसका नाम किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने वालों की सूची में डालना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीति में संख्या बढ़ाने से ज्यादा जरूरी लोगों का विश्वास हासिल करना है। पंजाब के लोग अब राजनीतिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर समझते हैं। किसी को दबाव में लाकर या सरकारी सुविधाओं और ग्रांटों के नाम पर राजनीतिक समर्थन हासिल करने से लंबे समय तक लोगों का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता।
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