अकाली दल ने किसानों के साथ एक्सईएन से की मुलाकात, बसपा नेता ने चेकिंग के बहाने दबाव बनाने का लगाया आरोप
फगवाड़ा — धान के सीजन में बिजली कटों को लेकर किसानों की परेशानी लगातार सामने आ रही है। इसी बीच पावरकॉम की चेकिंग को लेकर भी राजनीतिक नेताओं द्वारा सवाल उठाए जाने से मामला चर्चा में आ गया है। शिरोमणि अकाली दल के देहाती इंचार्ज राजिन्द्र सिंह चंदी ने करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों के साथ एक्सईएन पावरकॉम से मुलाकात कर बिजली सप्लाई का मुद्दा उठाया, जबकि दूसरी ओर बसपा के फगवाड़ा वाइस प्रधान सुखविन्द्र सिंह शेरगिल ने अपने खेत में बंद पड़ी मोटर की चेकिंग को लेकर विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
शिरोमणि अकाली दल हलका फगवाड़ा के देहाती इंचार्ज राजिन्द्र सिंह चंदी ने कहा कि गर्मी, बरसात और धान के सीजन में किसान बिजली कटों से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को आठ घंटे बिजली मिलने की बजाय कई बार दो-तीन घंटे की सप्लाई भी कटों से प्रभावित हो रही है, जिससे खेतों में खड़ी फसल को नुकसान का खतरा बना हुआ है।
चंदी ने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर वह करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों के साथ एक्सईएन पावरकॉम से मिले और लगभग एक घंटे तक बिजली सप्लाई संबंधी समस्याओं पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान किसी दबाव से डरने वाले नहीं हैं और किसानों की समस्याओं को उठाना जारी रखा जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसानों की पावरकॉम अधिकारियों द्वारा चेकिंग की जा रही है। चंदी ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल ऐसी धक्केशाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। बातचीत के दौरान एक्सईएन ने किसानों को भरोसा दिया कि तकनीकी खराबी के कारण बिजली कट लगे होंगे और अब किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा।
चेकिंग की कार्रवाई पर बसपा नेता सुखविंद्र सिंह शेरगिल ने उठाए सवाल

दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी फगवाड़ा के वाइस प्रधान सुखविन्द्र सिंह शेरगिल ने आरोप लगाया कि पावरकॉम के कुछ कर्मचारियों द्वारा उनके खेत में काफी समय से बंद पड़ी मोटर की चेकिंग की गई। शेरगिल ने कहा कि यदि चेकिंग की कार्रवाई के पीछे उन्हें डराने-धमकाने या दबाव में लाने की कोशिश है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शेरगिल ने कहा कि उनकी मोटर लंबे समय से बंद पड़ी है। ऐसे में चेकिंग के नाम पर की गई कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि किसानों को खेतीबाड़ी के लिए बिजली मुफ्त मिल रही है तो बिजली चोरी करने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने आरोप लगाया कि वह पंजाब में बिजली कटों और इनके कारण किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठा रहे हैं तथा सरकार को जवाबदेह बनाने की मांग कर रहे हैं। इसी कारण यदि उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है तो यह सरकारी धक्केशाही है।
शेरगिल ने कहा कि सरकार विरोधी आवाज को दबाया नहीं जा सकता और जनहित के मुद्दों को उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने बसपा पंजाब प्रधान अवतार सिंह करीमपुरी से भी बातचीत की है। उन्होंने कहा कि बसपा जनहित से जुड़े मुद्दों पर लोगों के साथ खड़ी रहेगी।
कार्रवाई पर जवाब का इंतजार
दोनों नेताओं के मामले अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हैं और इनके बीच किसी प्रकार का आपसी तालमेल या संयुक्त कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि, दोनों बयानों में बिजली सप्लाई और पावरकॉम की कार्रवाई को लेकर सवाल जरूर उठे हैं।
एक तरफ किसान बिजली कटों से परेशान होने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चेकिंग की कार्रवाई को लेकर दबाव बनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि पावरकॉम और सरकार इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देती है और किसानों को निर्बाध बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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