पंचायत यूनियन की मौजूदगी में सरपंच मीना ने कहा- कुछ लोग गांव का माहौल और आपसी भाईचारा खराब करने की कोशिश में
फगवाड़ा। गांव अकालगढ़ में वाल्मीकि समाज से जुड़े परिवारों को कथित तौर पर मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने और जातीय भेदभाव के लगाए गए आरोपों के बीच ग्राम पंचायत ने अपना पक्ष प्रशासन के सामने रखा है। पंचायत ने पंचायत यूनियन ब्लॉक फगवाड़ा के पदाधिकारियों की मौजूदगी में एस.डी.एम. फगवाड़ा डा. नवजोत शर्मा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया। सरपंच मीना अकालगढ़ की अगुवाई में पहुंचे पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि गांव में किसी भी समाज या व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता और सभी समुदायों के लोग आपसी सद्भावना के साथ रहते हैं।
सरपंच मीना ने कहा कि गांव में सभी धर्मों के त्योहार और धार्मिक समारोह भी सांझे तौर पर मनाए जाते हैं और पंचायत का प्रयास हमेशा गांव के भाईचारे को मजबूत बनाए रखने का रहा है। सरपंच मीना ने कहा कि उनके खिलाफ एस.डी.एम. को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव के 10 वाल्मीकि समाज से संबंधित परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। पंचायत की ओर से ज्ञापन देकर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट की गई है कि गांव में ऐसा कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा।
विकास कार्यों में जाति-धर्म से ऊपर उठकर प्राथमिकता देने का दावा
सरपंच मीना ने कहा कि नई बनी पंचायत की ओर से गांव में करवाए गए विकास कार्यों में सबसे पहले श्री वाल्मीकि मंदिर का निर्माण करवाया गया था। उनके अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि पंचायत सभी समाजों को बराबर महत्व देती है। समय-समय पर मिलने वाली सरकारी ग्रांटों को जाति और धर्म से ऊपर उठकर गांव के सांझे विकास तथा सभी लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए खर्च किया जाता है। सरपंच ने यह भी स्पष्ट किया कि वाल्मीकि समाज से संबंधित बताए जा रहे 10 परिवारों की संख्या सही नहीं है। उनके अनुसार गांव में वाल्मीकि समाज के कुल 7 घर हैं, जिनमें से 2 परिवार गांव से करीब आधा से पौना किलोमीटर दूर स्थित एक निजी कॉलोनी में रहते हैं। इसके बावजूद ग्राम पंचायत की ओर से अपनी हद तक वाटर सप्लाई की पाइपें आदि डालकर इन परिवारों को पानी की सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रबंध किया गया है।
शिकायत को बताया झूठा और बेबुनियाद
सरपंच मीना ने कहा कि उनकी ओर से कभी भी किसी व्यक्ति की शान या सम्मान के खिलाफ ऐसा कोई शब्द इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। उन्होंने अपने खिलाफ दी गई शिकायत को झूठा और बेबुनियाद बताया।

इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद गांववासियों ने सरपंच मीना के साथ एकजुटता जताई। गांववासियों ने कहा कि जिन दो परिवारों की वाटर सप्लाई को लेकर बात की जा रही है, उनकी ओर से सरपंच को इस संबंध में कोई लिखित पत्र नहीं दिया गया। गांववासियों ने प्रशासन से मामले की गहराई से जांच करवाने की मांग की।
इस अवसर पर पंचायत यूनियन ब्लॉक फगवाड़ा के प्रधान नरिन्द्र सिंह सरपंच माधोपुर, उपाध्यक्ष रणजीत राम कलेर सरपंच नंगल मज्झा, महासचिव आज्ञापाल सिंह खलवाड़ा, रिंपल कुमार सरपंच वजीदोवाल, सुरिंदर सिंह सरपंच खलवाड़ा कॉलोनी, बीबी चरणजीत कौर सरपंच देवा सिंह वाला, गुरदीप सिंह नंबरदार, पंचायत सदस्य सुमन लता, संदीप कौर, परमजीत कौर, चमन लाल, राजिंदर कौर के अलावा तरसेम लाल, बख्शीश सिंह, प्रीतम सिंह, प्रकाश राम, ओम प्रकाश, हरजिंदर पाल, कुलविंदर सिंह, जोगा सिंह, सुरिंदर कौर, निर्मल दास, जसविंदर कौर, जसबीर सिंह, सरवण सिंह, कुलदीप सिंह, रोशन लाल, गुरजीत कौर, मनजीत सिंह, मक्खन लाल, राजीव बंगड़, रणजीत कौर, मोहन लाल, रूप लाल, गुरजीत सिंह, भूपिंदर सिंह, अमरजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह, मलकीत सिंह, कमलजीत सिंह, अवतार सिंह, संतोख सिंह, मोहिंदर कौर और जसकरण आदि मौजूद थे।
वाल्मीकि समुदाय के पांच परिवारों ने भी जातीय भेदभाव के आरोपों को नकारा

इस दौरान गांव अकालगढ़ के निवासी और वाल्मीकि समुदाय से संबंधित बूटा राम, प्रदीप कुमार, राकेश कुमार, लवप्रीत, परमजीत राम और सुमन ने बताया कि उनकी बिरादरी के गांव में कुल 7 परिवार हैं, जिनमें से 2 परिवार गांव के बाहर एक कॉलोनी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि गांव में जातीय भेदभाव संबंधी लगाए जा रहे आरोप उचित नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की गहराई से जांच करवाने की मांग की, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
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