संजीव बुग्गा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर रणदीप सिंह हीर को सौंपा ज्ञापन, भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
फगवाड़ा। शहर के विभिन्न वार्डों में नालों की सफाई, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों, हॉर्टिकल्चर विभाग की कार्यप्रणाली तथा शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर नगर पार्षद संजीव बुग्गा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज नगर निगम कमिश्नर रणदीप सिंह हीर से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने शहर की मौजूदा व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाते हुए संबंधित समस्याओं का जल्द समाधान करवाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शहर के लगभग प्रत्येक वार्ड में एक-दो नाले ऐसे हैं, जिनकी नियमित सफाई नहीं हो रही। नालों में गंदगी जमा होने के कारण बरसात के दौरान जलभराव की समस्या बढ़ने का खतरा बना रहता है। पार्षदों ने सफाई व्यवस्था से संबंधित मेट रवि के कामकाज को लेकर भी कमिश्नर से शिकायत की और आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारी द्वारा अपने जिम्मे के काम को सही ढंग से नहीं किया जा रहा। उन्होंने इस मामले की जांच करवाने की मांग की।
करोड़ों के मेंटेनेंस ठेके पर उठाया सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। पार्षदों ने कहा कि उनके क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। जब स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये का मेंटेनेंस ठेका दिया गया है तो फिर शहर की इतनी बड़ी संख्या में लाइटें बंद क्यों हैं? प्रतिनिधिमंडल ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ठेके के तहत हुए काम तथा किए गए भुगतान की जांच करवाने की मांग की। पार्षदों ने इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए कहा कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को सुविधा नहीं मिल रही तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
हॉर्टिकल्चर व्यवस्था पर भी लगाए गंभीर आरोप
हॉर्टिकल्चर विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की। पार्षदों ने आरोप लगाया कि शहर के कई इलाकों में दो-दो और तीन-तीन महीनों से झाड़ियां, घास-फूस और पेड़ों की छंटाई नहीं हुई। कई जगह झाड़ियां इतनी बढ़ चुकी हैं कि लोगों को वहां से गुजरने में परेशानी होती है और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। पार्षदों ने हॉर्टिकल्चर विभाग की एस.डी.ओ. नेहा पंचाल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भी झाड़ियों की कटाई या अन्य काम के लिए संपर्क किया जाता है तो कई बार तेल उपलब्ध न होने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग के पास काम करने के लिए तेल तक उपलब्ध नहीं है तो फिर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी क्या है? प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर से इस पूरे मामले की समीक्षा करवाने की मांग की।
पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। पार्षदों ने कहा कि शहरों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर जनता लगातार परेशान है, जबकि सरकार की ओर से विकास और बेहतर व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जमीनी स्तर पर नालों की सफाई, स्ट्रीट लाइटों, झाड़ियों की कटाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भी पार्षदों को बार-बार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ें तो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।
पार्षदों ने कहा कि शहर की मौजूदा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के ठेकों और सरकारी फंड के बावजूद यदि जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्षद जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और अपने वार्डों की समस्याएं उठाना उनका दायित्व है। यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो पार्षदों को जनता की आवाज बुलंद करने के लिए मजबूरन आगे की कार्रवाई करनी पड़ेगी। प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर रंदीप सिंह हीर से मांग की कि नालों की सफाई, स्ट्रीट लाइटों और हॉर्टिकल्चर विभाग से संबंधित सभी शिकायतों की विभागवार समीक्षा करवाई जाए तथा जिन मामलों में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच करवाई जाए। इस अवसर पर गुरजीत वालिया डेलीगेट पंजाब, पार्षद तरनजीत सिंह बंटी वालिया, पार्षद जतिंदर वरमानी, पार्षद दर्शन कटारिया, पार्षद संजीव टीटू, पार्षद धीरज, पार्षद गुरप्रीत कौर जंडू, पार्षद मुकेश भाटिया सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद थे।
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