स्वच्छ भारत मिशन के तहत सिनेमा रोड पर कपड़े के थैलों का प्रोजेक्ट, दुकानदारों और लोगों को प्लास्टिक छोड़ने के लिए किया जागरूक
फगवाड़ा: प्लास्टिक के लिफाफे आज हमारी रोजमर्रा की खरीदारी का इतना सामान्य हिस्सा बन चुके हैं कि उनके पर्यावरण और शहर की सफाई पर पड़ने वाले असर को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसी आदत में बदलाव लाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत मिशन के तहत सिनेमा रोड क्षेत्र में कपड़े के थैले उपलब्ध करवाने का प्रोजेक्ट चलाया गया। नगर निगम फगवाड़ा में नियुक्त सीएफएल सुनीता शर्मा और आशा रानी ने स्थानीय दामोदरदास मंदिर कमेटी के प्रबंधक हरबंस लाल के सहयोग से चलाए इस अभियान के दौरान दुकानदारों और आम लोगों को प्लास्टिक के लिफाफों के बजाय कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। अभियान के दौरान दुकानदारों से अपील की गई कि वे ग्राहकों को सामान प्लास्टिक के लिफाफों में देने के बजाय कपड़े के थैलों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करें। लोगों को यह भी समझाया गया कि प्लास्टिक की समस्या केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध शहर की सफाई, सीवरेज व्यवस्था और बरसाती पानी की निकासी से भी है।
छोटी आदत, बड़ी समस्या
दामोदरदास मंदिर कमेटी के अध्यक्ष हरबंस लाल ने कहा कि प्लास्टिक के लिफाफों का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की आदत बन चुका है, लेकिन यही छोटी-सी आदत आगे चलकर बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि इस्तेमाल के बाद प्लास्टिक के लिफाफे अक्सर नालियों और सीवरेज सिस्टम में पहुंच जाते हैं, जिससे पानी की निकासी बाधित होती है। बरसात के दौरान यही रुकावट जलभराव की समस्या को बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का विकल्प अपनाना केवल सरकार या नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है। शहर को साफ रखने और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में प्रत्येक नागरिक की भूमिका है।
क्या कपड़े का थैला फिर बन सकता है रोजमर्रा की आदत?
हरबंस लाल ने कहा कि पुराने समय में लोग खरीदारी के लिए घर से कपड़े का थैला लेकर निकलते थे। यदि उसी आदत को दोबारा रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जाए तो प्लास्टिक के लिफाफों के इस्तेमाल को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उनके अनुसार पर्यावरण संरक्षण के लिए हमेशा बड़े अभियानों की जरूरत नहीं होती। रोजमर्रा की जिंदगी में किए गए छोटे-छोटे बदलाव भी सामूहिक रूप से बड़ा असर पैदा कर सकते हैं। अभियान के दौरान दुकानदारों ने भी पहल का स्वागत करते हुए भविष्य में प्लास्टिक के लिफाफों की जगह कपड़े के थैलों को प्राथमिकता देने तथा ग्राहकों को भी इसके लिए प्रेरित करने की बात कही।
दरअसल शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने की असली चुनौती सिर्फ प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाने की नहीं, बल्कि उस आदत को बदलने की है जिसके कारण हर छोटी खरीदारी के साथ एक नया प्लास्टिक लिफाफा घर आता है। जब दुकानदार विकल्प देना शुरू करें और ग्राहक अपना थैला लेकर निकलने लगें, तभी स्वच्छता का संदेश व्यवहार में बदल सकता है।
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