मामला पंजाब में अघोषित बिजली कटौती का, किसानों ने कहा—8 घंटे निर्बाध सप्लाई नहीं मिली तो होगा आंदोलन
बंगा/फगवाड़ा, 8 सितंबर।
बंगा सब-डिवीजन के गांवों में कथित तौर पर लग रहे अघोषित बिजली कटों को लेकर किसानों का रोष बढ़ता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) सहित विभिन्न किसान संगठनों ने बिजली सप्लाई की समस्या को लेकर पावरकॉम के एक्सईएन बंगा को मांग पत्र सौंपते हुए जल्द समाधान की मांग की है। किसान संगठनों ने पावरकॉम कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए कहा कि पिछले करीब दस दिनों से मोटरों के लिए किसी भी फीडर पर निर्धारित 8 घंटे की बिजली सप्लाई पूरी तरह नहीं मिल पा रही। किसानों का कहना है कि इसका सीधा असर धान की फसल पर पड़ रहा है और समय पर पानी न मिलने के कारण फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
भारतीय किसान यूनियन दोआबा के प्रदेश उपाध्यक्ष दविंदर सिंह संधवा ने कहा कि धान के सीजन को देखते हुए किसानों को कम से कम 8 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से धान सीजन में मोटरों को 8 घंटे बिजली देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन किसानों के अनुसार कई जगहों पर 2-3 घंटे से अधिक सप्लाई नहीं मिल रही और इसके बीच भी अचानक लंबे कट लग रहे हैं। किसानों ने मांग की कि कम से कम एक महीने तक मोटरों के लिए 8 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि बिजली सप्लाई की समस्या का तत्काल समाधान नहीं हुआ तो किसान संगठन बहराम टोल प्लाजा पर धरना लगाने के लिए मजबूर होंगे।
एक्सईएन का भरोसा—बिजली सप्लाई में नहीं आने दी जाएगी परेशानी
मांग पत्र लेने के बाद पावरकॉम बंगा के एक्सईएन इंद्रजीत पाल ने किसान नेताओं को भरोसा दिलाया कि बिजली सप्लाई को सुचारू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां ट्रांसफार्मर की समस्या के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है, वहां ट्रांसफार्मर बदलकर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी और किसानों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
अब देखना यह है कि पावरकॉम की ओर से दिया गया यह भरोसा खेतों तक कितनी जल्दी पहुंचता है। धान के सीजन में बिजली की निर्बाध सप्लाई किसानों के लिए सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि फसल बचाने की जरूरत है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिजली सप्लाई की स्थिति और विभाग की कार्रवाई पर किसानों की नजर रहेगी।
इस मौके पर जिला प्रधान बलविंदर सिंह, जिला उपप्रधान रविंदर सिंह सहित मेजर सिंह, कुलविंदर सिंह, गुरदियाल सिंह, कुलवंत सिंह, बूटा सिंह, स्वर्ण सिंह, मदन लाल, गुरदेव सिंह, प्रगट सिंह, गुरविंदर सिंह, सुखदेव सिंह, गुरजीत सिंह, निर्वैर सिंह, सुखविंदर सिंह, जसकरण सिंह, अवतार सिंह, सतविंदर सिंह, माखन सिंह, इकबाल सिंह, लखबीर सिंह, गुरदीप सिंह, सोभा सिंह, मनजीत सिंह, कुलदीप सिंह, हरदीप सिंह, जगबीर सिंह सहित अन्य किसान मौजूद थे।
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