धालीवाल ने अमित शाह के जालंधर दौरे पर उठाए सवाल; कहा—पंजाब को बदनाम करने के बजाय केंद्र अपनी भूमिका और पिछले वर्षों का रिपोर्ट कार्ड सामने रखे
फगवाड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जालंधर दौरे और भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के बीच पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। पूर्व आईएएस अधिकारी एवं विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल ने अमित शाह के दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नशे की समस्या पर राजनीति करने से पहले केंद्र सरकार को अपनी भूमिका और पिछले 12 वर्षों की कार्रवाई का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। धालीवाल ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या गंभीर है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन सवाल केवल यह नहीं है कि नशा पंजाब तक कैसे पहुंच रहा है। बड़ा सवाल यह भी है कि सीमा पार से आने वाली सप्लाई को रोकने के लिए केंद्र की एजेंसियों ने अब तक क्या किया और उसके परिणाम क्या रहे? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर तक BSF के क्षेत्राधिकार का विस्तार किया था। केंद्र ने उस समय इसे सीमा पार अपराध और तस्करी पर अधिक प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया था।
50 किलोमीटर का क्षेत्राधिकार, फिर भी ड्रोन और तस्करी का सवाल
धालीवाल ने सवाल उठाया कि यदि सीमा सुरक्षा और सीमा पार से होने वाली तस्करी पर केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका है, तो पिछले वर्षों में ड्रोन के जरिए होने वाली नशे और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए किए गए प्रयासों और उनके परिणामों का सार्वजनिक रिपोर्ट कार्ड क्यों नहीं सामने रखा जाता? यहां एक तथ्य स्पष्ट करना भी जरूरी है—50 किलोमीटर का BSF क्षेत्राधिकार पंजाब पुलिस की भूमिका खत्म नहीं करता। केंद्र के अनुसार BSF को कुछ केंद्रीय कानूनों के तहत विशेष अधिकार दिए गए हैं और वह राज्य पुलिस के साथ मिलकर सीमा पार अपराधों पर कार्रवाई करती है। यानी नशे की सप्लाई चेन को रोकने की जिम्मेदारी को केवल राज्य या केवल केंद्र के खाते में डालना तस्वीर को अधूरा कर देता है। सीमा पर निगरानी, सीमा पार नेटवर्क की पहचान और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के साथ-साथ राज्य पुलिस की स्थानीय स्तर पर कार्रवाई भी इस पूरी व्यवस्था का हिस्सा है।
जनता के सामने कौन रखेगा पूरा हिसाब?
धालीवाल ने सवाल किया कि पिछले 12 वर्षों में कितने ड्रोन पकड़े गए, सीमा पार से नशे की तस्करी के कितने बड़े नेटवर्क तक एजेंसियां पहुंचीं और मुख्य संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? उन्होंने यह भी पूछा कि भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के दौरान केंद्र सरकार अपनी भूमिका और उपलब्धियों का सार्वजनिक रिपोर्ट कार्ड क्यों नहीं जारी कर रही। केंद्र सरकार ने पहले लोकसभा में बताया था कि 11 अक्टूबर 2021 से जुलाई 2022 के बीच BSF द्वारा पंजाब सहित संबंधित सीमा क्षेत्रों में कई ड्रोन, बड़ी मात्रा में हेरोइन और अन्य सामग्री जब्त की गई थी। यह आंकड़ा यह भी दिखाता है कि सीमा पार तस्करी की चुनौती वास्तविक और लगातार बनी हुई है—सवाल अब यह है कि इतने वर्षों की कार्रवाई के बावजूद सप्लाई नेटवर्क पूरी तरह क्यों नहीं टूट पाया?
नशे के खिलाफ अभियान बनाम जवाबदेही का सवाल
भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ 18 सितंबर को शुरू हुई थी और 30 सितंबर को जालंधर में अमित शाह की रैली के साथ इसका समापन हुआ। पार्टी की चार यात्राओं ने पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय की। ऐसे में पंजाब की राजनीति में अब बहस केवल इस बात पर नहीं है कि नशे के खिलाफ कौन खड़ा है, बल्कि यह भी है कि नशे की सप्लाई रोकने की पूरी श्रृंखला में किस स्तर पर क्या जिम्मेदारी है और उसका परिणाम क्या रहा। धालीवाल ने कहा कि पंजाब के युवा और नशे से प्रभावित परिवार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि नशे की सप्लाई रोकने, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कार्रवाई करने और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब को बदनाम करने की राजनीति से समस्या का समाधान नहीं होगा और केंद्र तथा राज्य—दोनों स्तरों पर ठोस कार्रवाई और जवाबदेही जरूरी है।
Discover more from D-News Watch
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

