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फगवाड़ा। अंबेडकर सेना मूलनिवासी ने फगवाड़ा शहर के गोल चौक का नाम ‘संविधान चौक’ रखने की लंबे समय से चली आ रही मांग को फिर उठाते हुए आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज डॉ. राज कुमार चब्बेवाल से इस मामले का समाधान निकालने की अपील की है।

संगठन के नेताओं ने आज जारी एक प्रेस बयान के माध्यम से कहा कि फगवाड़ा में ‘संविधान चौक’ के साथ-साथ ‘शहीद भगत सिंह चौक’ बनाया जाना चाहिए, जिससे दोनों महान शख्सियतों को सम्मान मिलेगा और शहर में भाईचारे की साझेदारी को मजबूत करने का संदेश जाएगा। अंबेडकर सेना मूलनिवासी के नेताओं ने कहा कि फगवाड़ा के बहुजन समाज की ओर से लंबे समय से गोल चौक का नाम ‘संविधान चौक’ रखने की मांग की जा रही है, जबकि कुछ हिंदू संगठनों की ओर से इसका नाम ‘शहीद भगत सिंह चौक’ रखने की मांग की जाती रही है।

संगठन के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर वर्ष 2018 में शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया था, जिसके दौरान दलित समाज से संबंधित यशवंत बॉबी की मौत भी हुई थी। संगठन ने कहा कि उस समय की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से इस चौक का नाम ‘संविधान चौक’ रखने की घोषणा की गई थी, लेकिन बाद में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद भी यह मामला हल नहीं हो सका। नेताओं ने कहा कि इस मांग को लेकर अंबेडकर सेना मूलनिवासी की ओर से नगर निगम फगवाड़ा के कमिश्नर और मेयर को मांग पत्र भी दिए जा चुके हैं।

संगठन के नेताओं ने कहा कि वे समूचे दलित समाज की ओर से राज कुमार चब्बेवाल से अपील करते हैं कि फगवाड़ा में ‘संविधान चौक’ और ‘शहीद भगत सिंह चौक’ बनाने संबंधी जल्द कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि इस मामले का समाधान किसी एक पक्ष की जीत या हार के रूप में नहीं, बल्कि आपसी सहमति और भाईचारे के साथ निकाला जाना चाहिए।

नेताओं ने मांग की कि ‘संविधान चौक’ बनाए जाने का विरोध कर रहे संगठनों, शहर की पीस कमेटी और संबंधित पक्षों के साथ जल्द से जल्द संयुक्त बैठक करवाई जाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस मामले का बातचीत के माध्यम से स्थायी समाधान निकालने से शहर में अमन-शांति बनाए रखने के साथ-साथ आपसी भाईचारे को भी और मजबूत किया जा सकता है।

सवाल यही है कि जिस शहर ने पहले इस विवाद के कारण तनाव देखा है, क्या अब उसी मुद्दे का समाधान आपसी बातचीत, सहमति और भाईचारे के साथ नहीं निकाला जा सकता? डॉ. भीमराव अंबेडकर का संविधान और शहीद भगत सिंह का स्वतंत्रता संग्राम—दोनों ही देश के इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय हैं। ऐसे में फगवाड़ा के लिए चुनौती यह है कि इन ऐतिहासिक प्रतीकों को विवाद का कारण बनाने के बजाय आपसी सम्मान और सामाजिक एकता का माध्यम कैसे बनाया जाए।


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