अमृतसर में ड्यूटी पर ASI की हत्या से लेकर फगवाड़ा में पेट्रोल बम और फायरिंग की घटनाएं; भाजपा नेता ने कानून-व्यवस्था पर सरकार से मांगा जवाब
फगवाड़ा — पंजाब में अपराध, फायरिंग, गैंगवार, नशा और हथियारों से जुड़ी घटनाओं को लेकर पूर्व मेयर एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण खोसला ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि स्थिति ऐसी बनती जा रही है जहां अपराधियों में कानून का भय कम होता दिखाई दे रहा है और पुलिसकर्मी भी निशाना बन रहे हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब 18 सितंबर को अमृतसर में पंजाब पुलिस के एएसआई हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
जब रक्षक ही निशाने पर हों तो सवाल बड़ा हो जाता है
अरुण खोसला ने कहा कि आम नागरिक पुलिस को अपनी सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी सौंपता है, लेकिन जब ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ही हमले का शिकार हो जाए तो यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं रहती, बल्कि कानून के भय और पुलिस व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल खड़े करती है। उन्होंने पंजाब में पहले पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों और थानों पर ग्रेनेड हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को यह देखना होगा कि अपराधियों तक हथियार और नशा पहुंचाने वाले नेटवर्क को रोकने में कहां कमी रह रही है।
लोगों के घरों तक पहुंचा डर
खोसला ने फगवाड़ा की हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि बसंत नगर क्षेत्र की झापर कॉलोनी में नकाबपोश युवकों द्वारा एक घर पर पेट्रोल से भरी बोतलें फेंकने की घटना ने इलाके में चिंता पैदा की। इससे पहले नंगल कॉलोनी में एक घर पर हथियारबंद हमलावरों द्वारा फायरिंग किए जाने की घटना का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब परिवार अपने घर के अंदर भी यह सोचने को मजबूर हो जाए कि बाहर से गोली या पेट्रोल बम आ सकता है, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का आंकड़ा नहीं बल्कि आम नागरिक के सुरक्षा-बोध का सवाल बन जाता है।
नशा और हथियार: सिर्फ कार्रवाई नहीं, नेटवर्क तोड़ने की चुनौती
फरीदकोट में हेरोइन और हथियारों की बरामदगी तथा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आ रही गैंग और हथियारों से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए खोसला ने सरकार की नशा विरोधी मुहिम पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि एक तरफ नशे के खिलाफ बड़े अभियान चलाने की बात हो रही है और दूसरी तरफ लगातार नशीले पदार्थों तथा हथियारों की बरामदगी सामने आ रही है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री से सीधे जवाब की मांग
खोसला ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार लगातार गंभीर घटनाओं के बीच सरकार को केवल घटना के बाद पुलिस कार्रवाई बताने के बजाय अपराध को रोकने की रणनीति भी सामने रखनी चाहिए।
सीमावर्ती राज्य होने से चुनौती और बड़ी है
खोसला ने कहा कि पंजाब पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाला संवेदनशील राज्य है। ऐसे में नशा तस्करी, हथियारों की तस्करी, गैंगस्टर नेटवर्क और सीमा पार से संभावित आपराधिक अथवा आतंकी गतिविधियों को रोकना केवल सामान्य कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने मजबूत पुलिस व्यवस्था और प्रभावी खुफिया तंत्र की जरूरत पर जोर दिया।
कहा : 2027 में सुरक्षा भी बनेगा राजनीतिक मुद्दा
खोसला के बयान का सबसे राजनीतिक हिस्सा आगामी ने कहा कि आने वाले चुनाव में पंजाब की जनता के सामने केवल राजनीतिक वादे नहीं, बल्कि सुरक्षित पंजाब, नशे पर नियंत्रण, गैंगस्टरवाद पर लगाम, पुलिस की सुरक्षा तथा आम नागरिक के जीवन और संपत्ति की रक्षा भी बड़े मुद्दे होंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आती है तो कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा जाएगा और ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास किया जाएगा जिसमें अपराधियों में कानून का भय तथा आम नागरिक में सुरक्षा का विश्वास हो।
बहरहाल, पंजाब में कानून-व्यवस्था की बहस अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह सकती। सवाल यह है कि पुलिस पर हमला और राह चलते हत्या जैसे संगीन अपराध करने वाले अपराधियों से लेकर घरों पर फायरिंग और पेट्रोल बम फेंकने वालों तक—इन नेटवर्क को घटना के बाद पकड़ने के साथ-साथ घटना से पहले रोकने की व्यवस्था कितनी मजबूत है? क्योंकि आम नागरिक के लिए कानून-व्यवस्था का असली पैमाना केवल बताए गए आंकड़े नहीं, बल्कि यह भरोसा है कि वह अपने घर में परिवार के साथ सुरक्षित सो सकता है।
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