गुलजार सिंह रणीके की अगुवाई में पहुंचे अकाली नेता-कार्यकर्ता, सरूप सिंह खलवाड़ा ने की वित्त मंत्री हरपाल चीमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग
संगरूर/फगवाड़ा: संगरूर जिले के दिड़बा हलके के गांव तूर बंजारा निवासी गुलजार सिंह की आत्महत्या के मामले को लेकर पंजाब की राजनीति में उठे सवालों के बीच शिरोमणि अकाली दल के एस.सी. विंग की ओर से दिड़बा में विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में फगवाड़ा से भी अकाली नेताओं और कार्यकर्ताओं का जत्था शामिल हुआ। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं एस.सी. विंग के अध्यक्ष गुलजार सिंह रणीके के नेतृत्व में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की कोठी के घेराव में एस.सी. विंग जिला कपूरथला के अध्यक्ष जथेदार सरूप सिंह खलवाड़ा, दोआबा जोन अध्यक्ष कुलदीप सिंह तथा देहाती अध्यक्ष सुरिंदर सिंह की अगुवाई में फगवाड़ा से जत्था पहुंचा। उनके साथ सरवण सिंह सरदुल्ला सरपंच, जतिंदर सिंह फौजी, चरणजीत सिंह सहोता सहित अन्य अकाली नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
मामला सिर्फ राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं
जथेदार सरूप सिंह खलवाड़ा ने कहा कि एस.सी. विंग की ओर से गुलजार सिंह तूर बंजारा के परिवार को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर दिड़बा में रोष प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने कहा कि फगवाड़ा और जिला कपूरथला से अकाली कार्यकर्ता पार्टी की इस मुहिम में शामिल होने के लिए दिड़बा पहुंचे। उन्होंने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि शिरोमणि अकाली दल गुलजार सिंह के परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा।
हालांकि, इस पूरे मामले में हरपाल सिंह चीमा की ओर से भी विरोधी दलों पर राजनीतिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में गुलजार सिंह की मौत से जुड़े आरोपों और उनकी कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया का विषय है।
सरकार पर अकाली दल का राजनीतिक हमला
जथेदार खलवाड़ा ने आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना गुलजार सिंह के परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। अकाली दल ने इस कदम की कड़ी निंदा करने की बात कही। गौरतलब है कि गुलजार सिंह तूर बंजारा मामले को लेकर इससे पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों और जनसंगठनों की ओर से प्रदर्शन किए जा चुके हैं। 19 सितंबर को विभिन्न जनवादी संगठनों ने भी दिड़बा मामले में चीमा को नामजद करने सहित कई मांगों को लेकर रोष मार्च किया था।
बहरहाल, गुलजार सिंह की मौत को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन परिवार द्वारा उठाए गए सवालों और सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और पीड़ित परिवार को न्याय—इन तीनों पर स्पष्टता होना इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है।
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