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स. पतविंदर सिंह छाबड़ा एवं स. जसवीर सिंह भुल्लाराई

फगवाड़ा — अमरजीत सिंह चावला मामले को लेकर पंजाब सरकार की कार्रवाई और पंथक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के फगवाड़ा शहरी अध्यक्ष स. पतविंदर सिंह छाबड़ा और देहाती अध्यक्ष स. जसवीर सिंह भुल्लाराई ने संयुक्त बयान जारी किया है। दोनों नेताओं ने पुलिस पर FIR दर्ज करने में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस देरी के बाद चावला को विदेश जाने का मौका मिल गया। दोनों नेताओं ने कहा कि यह गंभीर विषय है कि पुलिस ने समय पर FIR दर्ज नहीं की और गिरफ्तारी की कार्रवाई होने से पहले संबंधित व्यक्ति विदेश चला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम से यह सवाल पैदा होता है कि क्या पुलिस पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय किसी राजनीतिक दबाव में काम कर रही थी।

छाबड़ा और भुल्लाराई ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि अमरजीत सिंह चावला मामले में अब तक पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और FIR दर्ज करने में हुई देरी के कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अकाली नेताओं ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष स. हरजिंदर सिंह धामी की ओर से मामले पर कथित रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने बादल दल के अध्यक्ष सहित पूरी लीडरशिप की चुप्पी को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले में संबंधित नेताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनके अनुसार पंथक संस्थाओं और उनसे जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता बेहद जरूरी है।

स. पतविंदर सिंह छाबड़ा और स. जसवीर सिंह भुल्लाराई ने पंथ हितैषी संगत तथा सिख बुद्धिजीवी वर्ग के प्रतिनिधियों से मौजूदा पंथक परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने और सिख पंथ को संकट से बाहर निकालने के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि बादल दल और उसके नेताओं पर लगाए जा रहे आरोप पंथ के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। दोनों नेताओं ने दावा किया कि बादल दल की पिछली कार्रवाइयों के कारण पहले ही सिख पंथ को नुकसान पहुंचा है और मौजूदा परिस्थितियां भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।

अकाली नेताओं ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदारों द्वारा चावला को पंथ में से खारिज किए जाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि फैसला देर से आया, लेकिन पंथक संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना समय की मुख्य जरूरत है। उन्होंने पंजाब सरकार से दोबारा मांग की कि अमरजीत सिंह चावला मामले में अब तक हुई कार्रवाई के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जाए तथा पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


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