कांग्रेस ने विधायक बलविन्द्र सिंह धालीवाल के नेतृत्व में डी.जी.पी. पंजाब के नाम एस.पी. फगवाड़ा को सौंपा मांग पत्र
फगवाड़ा — संगरूर जिले के गांव तूर बंजारा निवासी दलित मजदूर गुलजार सिंह की आत्महत्या का मामला अब केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने पुलिस जांच, राजनीतिक प्रभाव और आम नागरिक द्वारा सत्ता से सवाल पूछने के बाद पैदा हुए कथित दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी मामले में कांग्रेस ने अब पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ भी एफ.आई.आर. दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है। कांग्रेस की ओर से पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी एवं फगवाड़ा विधायक बलविन्द्र सिंह धालीवाल के नेतृत्व में डी.जी.पी. पंजाब के नाम फगवाड़ा के एस.पी. मेजर सिंह को मांग पत्र सौंपा गया। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि गुलजार सिंह की मौत से जुड़े प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच हो और यदि जांच में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की कोई भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। विधायक धालीवाल ने कहा कि गुलजार सिंह ने अपनी मौत से पहले कथित तौर पर दिए बयान में हरपाल सिंह चीमा और उनके साथियों पर डराने-धमकाने तथा कथित रूप से जलील किए जाने के आरोप लगाए थे। कांग्रेस का कहना है कि जब मृतक ने अपनी मौत से पहले किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराते हुए बयान दिया है तो उस बयान की जांच करना पुलिस की जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की है, लेकिन वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम उसमें शामिल नहीं किया गया। कांग्रेस के अनुसार सवाल यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी मान लिया जाए, बल्कि सवाल यह है कि मृतक द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सभी संबंधित लोगों को जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए?
मामला अब पुलिस जांच से आगे न्यायिक निगरानी तक पहुंच चुका है
गुलजार सिंह मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी सरकार से जांच की स्थिति संबंधी रिपोर्ट मांग चुका है। अदालत में दायर याचिका में जांच को राज्य पुलिस से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी, जिसमें सी.बी.आई. भी शामिल है, को सौंपने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल किया था कि जब मंत्री की कोई प्रत्यक्ष भूमिका एफ.आई.आर. में आरोपित नहीं की गई है तो उन्हें एफ.आई.आर. में आरोपी बनाने का आधार क्या है। याचिकाकर्ता की ओर से हालांकि यह दलील दी गई कि मृतक के बयान में लगाए गए आरोपों की जांच जरूरी है। मामले की जांच के लिए पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) गठित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। ऐसे में अब जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता ही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गई है।
कांग्रेस ने पूछा—अगर आरोप गलत हैं तो जांच से डर कैसा?
विधायक धालीवाल ने कहा कि कांग्रेस किसी को बिना जांच दोषी ठहराने की मांग नहीं कर रही, बल्कि यह चाहती है कि गुलजार सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की कानून के मुताबिक जांच हो। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप निराधार पाए जाते हैं तो तथ्य सामने आ जाएंगे, लेकिन यदि कोई भूमिका सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि गुलजार सिंह का अंतिम संस्कार परिवार की इच्छा के विपरीत सरकार की ओर से जबरदस्ती करवाया गया। पार्टी ने इस आरोप की भी जांच कराने और मृतक के परिवार को न्याय तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
चीमा पहले ही विपक्ष पर लगा चुके हैं साजिश का आरोप
दूसरी ओर, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा इस पूरे विवाद में विपक्षी दलों पर उन्हें फंसाने की साजिश रचने का आरोप लगा चुके हैं। चीमा ने कहा है कि उनके पास अपने बचाव में तथ्य और सबूत हैं जिन्हें वह जांच पूरी होने के बाद सामने रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के संबंध में टिप्पणी की है। यानी इस मामले में फिलहाल दो बिल्कुल अलग दावे सामने हैं—एक तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मृतक के कथित बयान के आधार पर मंत्री की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि चीमा इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। अंतिम तथ्य जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
गुलजार सिंह की मौत के मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि जांच का दायरा कितना व्यापक रखा जाता है। यदि मृतक के कथित अंतिम बयान में किसी व्यक्ति या प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति के संबंध में आरोप हैं, तो उन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच होना पारदर्शी जांच की कसौटी होगी। मामला हाईकोर्ट की निगरानी में स्टेटस रिपोर्ट तक पहुंच चुका है। ऐसे में सरकार और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जांच ऐसी हो जिस पर मृतक के परिवार, विपक्ष और आम जनता—तीनों को भरोसा हो सके।
उधर कांग्रेस ने मांग की कि गुलजार सिंह और उसके परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर ब्लाक कांग्रेस फगवाड़ा शहरी एवं देहाती के कांग्रेस कार्यकर्ता, समर्थक, एस.सी. विंग, महिला विंग, ओ.बी.सी. विंग एवं यूथ कांग्रेस के नेता, विभिन्न गांवों के सरपंच, पंच तथा नंबरदार बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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