डा. परमजीत बोले—जीवन भर की कमाई लगाने वाले निवेशकों को पूरी राशि मिले, ब्याज के बिना भुगतान पर उठ रहे सवाल
फगवाड़ा। परल कंपनी में अपनी जीवन भर की कमाई निवेश करने के बाद वर्षों से पैसे की वापसी का इंतजार कर रहे निवेशकों का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। निवेशकों की राशि की वापसी और उनके अधिकारों को लेकर ‘इंसाफ की आवाज’ संगठन की ओर से 27 सितंबर को लुधियाना में विशाल रोष प्रदर्शन किया जाएगा। जिला कपूरथला के अध्यक्ष डा. परमजीत सिंह दुग्गां ने कहा कि परल पीड़ित निवेशकों को उनकी पूरी राशि वापस मिलनी चाहिए। उनके अनुसार लोधा कमेटी के माध्यम से निवेशकों के खातों में ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है, लेकिन बिना ब्याज राशि वापस किए जाने को लेकर निवेशकों में असंतोष है।
सवाल सिर्फ भुगतान का नहीं, पूरी रकम वापस मिलने का है
परल पीड़ितों का कहना है कि जिन लोगों ने वर्षों पहले अपनी मेहनत और जीवन भर की बचत कंपनी में लगाई थी, उनके लिए यह केवल निवेश की रकम नहीं बल्कि परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है। ऐसे में लंबे इंतजार के बाद यदि मूल राशि भी पूरी तरह वापस नहीं मिलती या ब्याज का भुगतान नहीं होता, तो निवेशकों के सामने आर्थिक नुकसान का सवाल बना रहता है। डा. परमजीत सिंह ने कहा कि निवेशकों को उनकी पूरी राशि वापस मिलना उनका अधिकार है और जब तक प्रत्येक पीड़ित निवेशक को उसकी राशि वापस नहीं मिलती, संगठन का संघर्ष जारी रहेगा।
2027 के चुनाव से पहले भुगतान की मांग
संगठन की ओर से केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की बात भी कही गई है। डा. परमजीत सिंह के अनुसार संगठन चाहता है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले परल पीड़ित निवेशकों की राशि उनके खातों में पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा पीड़ित निवेशकों का पैसा जल्द वापस नहीं किया गया तो आने वाले चुनावों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा।लुधियाना में होने वाली 27 सितंबर की रैली को संगठन निवेशकों की सामूहिक आवाज को मजबूत करने के अवसर के तौर पर देख रहा है। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में निवेशकों की भागीदारी से सरकार के सामने यह संदेश जाएगा कि यह मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है और प्रभावित परिवार अपनी राशि की वापसी के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। डा. परमजीत सिंह ने निवेशकों से अधिक से अधिक संख्या में लुधियाना पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निवेशक ऑनलाइन सदस्य बनकर भी संगठन को मजबूत कर सकते हैं। इसके साथ ही पोर्टल के माध्यम से सदस्यता लेने और अपनी पॉलिसियां अपलोड करने की अपील भी की गई है।
सवाल: वर्षों के इंतजार का पूरा हिसाब कब?
परल पीड़ितों का मामला केवल रकम की वापसी तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि जिन लोगों की मेहनत की कमाई लंबे समय से अटकी हुई है, उन्हें उनकी पूरी देय राशि कब मिलेगी और इस प्रक्रिया की अंतिम समय-सीमा क्या है? 27 सितंबर का लुधियाना प्रदर्शन इसी सवाल को सार्वजनिक रूप से उठाने की कोशिश है। अब देखना यह होगा कि निवेशकों की इस मांग पर सरकार और संबंधित तंत्र की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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