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फगवाड़ा में हनुमान अंश फिल्म की मुफ्त सक्रीनिंग से पहले धार्मिक रस्म निभाते हुए श्री बाला जी धाम के सदस्य और समाज सेवक आशु मट्टू, बस को हरी झंडी दिखाते हुए डा. राजकुमार चब्बेवाल और प्राईम सिनेमा में फिल्म का आनंद लेते भाव-विभोर दर्शक।

श्री बालाजी धाम प्रबंधक कमेटी ने निभाई सेवा, सांसद डा. राज कुमार चब्बेवाल ने दर्शकों की बस को दिखाई हरी झंडी

फगवाड़ा। मनोरंजन के साथ धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश देने वाली फिल्मों को आम लोगों तक पहुंचाने की पहल के तहत फगवाड़ा के प्राइम सिनेमा में बहुचर्चित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की विशेष नि:शुल्क स्क्रीनिंग करवाई गई। समाज सेवक राजकुमार मट्टू के सहयोग से आयोजित इस स्क्रीनिंग में शहरवासियों और धर्मप्रेमी लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान दर्शकों को भगवान हनुमान से जुड़े धार्मिक एवं भावनात्मक प्रसंगों के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी देखने को मिले। नि:शुल्क स्क्रीनिंग का उद्देश्य ऐसे सकारात्मक संदेशों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना रहा।

सिर्फ फिल्म देखना नहीं, एक संदेश से जुड़ना भी

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि दर्शकों को फिल्म देखने की सुविधा उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें सामूहिक रूप से कार्यक्रम तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई। श्री बालाजी धाम प्रबंधक कमेटी की ओर से टिकटों के वितरण के अलावा श्रद्धालुओं और अन्य दर्शकों को प्राइम सिनेमा तक पहुंचाने में सहयोग किया गया। सांसद डा. राज कुमार चब्बेवाल ने दर्शकों से भरी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे बड़ी संख्या में लोगों के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग में शामिल होना आसान हुआ।

राजकुमार मट्टू बोले—अच्छे संदेश समाज तक पहुंचाना जरूरी

समाज सेवक राजकुमार मट्टू ने कहा कि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश देने वाली फिल्मों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले विषयों पर बनी फिल्मों को लोगों तक पहुंचाने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत ‘हनुमान अंश’ की नि:शुल्क स्क्रीनिंग करवाने की सेवा की गई है। भविष्य में भी अवसर मिलने पर विभिन्न धर्मों तथा अच्छे सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों की नि:शुल्क स्क्रीनिंग करवाने का प्रयास किया जाएगा।

राजकुमार मट्टू ने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं। सही विषय और उद्देश्य के साथ बनाई गई फिल्में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता पैदा करने का प्रभावी माध्यम भी बन सकती हैं। उनकी इस पहल के पीछे यही सोच दिखाई देती है कि यदि किसी फिल्म के माध्यम से सकारात्मक विचार समाज के अधिक लोगों तक पहुंच सकते हैं, तो उसे देखने का अवसर भी अधिक से अधिक लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्मों को सहयोग देने के प्रयास जारी रखे जाएंगे।


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