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33 हजार फीट पर जिंदगी और मौत के बीच लड़ते रहे भारतीय पायलट; गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलकर यात्रियों को दिया हमलावर तक पहुंचने का मौका

नई दिल्ली/तेल अवीव, 1 अक्टूबर।
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके ओमानी को-पायलट ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया। हमले के बाद विमान तेजी से नीचे आने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने संघर्ष जारी रखा और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की। इसके बाद यात्री और क्रू सदस्य अंदर पहुंचे तथा हमलावर को काबू करने में मदद मिली। विमान में मौजूद अतिरिक्त फ्लाईदुबाई पायलटों ने बाद में नियंत्रण संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। इस भारतीय जाँबाज कप्तान को दुनिया सलाम कर रही है।

“स्मित मच्छार एक HERO हैं”—PM मोदी

घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की खुलकर प्रशंसा की। मोदी ने कहा कि गंभीर रूप से घायल होने और बेहद खतरनाक परिस्थितियों के बावजूद मच्छार ने दूसरों की जान बचाने के लिए असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प दिखाया। प्रधानमंत्री के मुताबिक उनकी बहादुरी से सैकड़ों लोगों की जान बचाने और एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद मिली। प्रधानमंत्री ने कैप्टन मच्छार के शीघ्र स्वस्थ होने, नई ताकत हासिल करने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की तथा कहा कि भारत को उन पर गर्व है।

ट्रंप ने भी बताया “हीरो”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की प्रशंसा की। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें नेतन्याहू से घटना के बारे में जानकारी मिली थी। उन्होंने घायल पायलट को “हीरो” बताया और कहा कि इतनी गंभीर स्थिति में भी उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रंप ने उस यात्री की भूमिका की भी चर्चा की जिसने कॉकपिट में पहुंचकर विमान को स्थिर करने में मदद की। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह घटना के बारे में मिली जानकारी के आधार पर बात कर रहे थे।

नेतन्याहू का बड़ा आकलन—“9/11 जैसी त्रासदी टली”

इस घटना को लेकर सबसे गंभीर टिप्पणी इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू की ओर से सामने आई। नेतन्याहू ने कहा कि उपलब्ध घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि पायलटों ने एक संभावित “9/11 disaster” को रोकने में भूमिका निभाई। उन्होंने यह टिप्पणी उस स्थिति के संदर्भ में की जिसमें विमान तेजी से नीचे आया, कॉकपिट में संघर्ष हुआ और यात्रियों तथा अतिरिक्त पायलटों को विमान का नियंत्रण संभालने में मदद करनी पड़ी।

एक कप्तान घायल था, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी

इस घटना की सबसे असाधारण बात यही रही कि जिस व्यक्ति पर हमला हुआ, वही व्यक्ति संकट से निकलने का रास्ता खोलने में महत्वपूर्ण साबित हुआ। कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल थे। इसके बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खुला। यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचने का मौका मिला। हमलावर को काबू किया गया और विमान में मौजूद अतिरिक्त पायलटों ने नियंत्रण संभाला। इसके बाद विमान ने अपना रास्ता बदला और सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग की। भारतीय दूतावास के मुताबिक कैप्टन मच्छार को तबूक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है। भारतीय अधिकारी उनके परिवार के संपर्क में हैं और उनकी चिकित्सा स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

दुनिया ने देखा—कॉकपिट में एक फैसला कितना बड़ा होता है

यह घटना सिर्फ एक विमान में हुए कथित हमले की कहानी नहीं है। यह उस क्षण की कहानी है जब हजारों फीट ऊपर एक विमान तेजी से नीचे जा रहा था, कॉकपिट में संघर्ष चल रहा था और 174 यात्रियों को यह तक पता नहीं था कि अगले कुछ मिनट उनके लिए क्या लेकर आने वाले हैं। उस वक्त कैप्टन स्मित मच्छार का घायल होने के बावजूद संघर्ष जारी रखना, कॉकपिट का दरवाजा खुलना, यात्रियों और क्रू का आगे आना तथा अतिरिक्त पायलटों का नियंत्रण संभालना—इन सभी घटनाओं ने मिलकर उस विमान को तबूक की रनवे तक पहुंचाया। आज प्रधानमंत्री मोदी से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू तक कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को सलाम कर रहे हैं। भारत के इस जांबाज़ कप्तान के लिए दुनिया की एक ही दुआ है—स्मित मच्छार जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर वापस लौटें।


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