अकालगढ़ में जातीय भेदभाव के आरोपों पर पंचायत का जवाब, कहा- पानी का मामला जाति नहीं बल्कि प्राइवेट कॉलोनी और अधिकार क्षेत्र से जुड़ा
पंचायत व वाल्मीकि समुदाय के कुछ लोगों ने आरोपों को नकारा; कहा- गांव में सभी वर्गों को विकास का लाभ, धर्मशाला का काम भी प्राथमिकता से करवाया
फगवाड़ा/राममूर्ति लाली
गांव अकालगढ़ में वाल्मीकि समुदाय के परिवारों को कथित तौर पर बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखने और जातीय भेदभाव के आरोपों के बाद अब गांव की पंचायत ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है। सरपंच मीना अकालगढ़ और उनके देवर जतिंदर सिंह ने पंचायत सदस्यों तथा वाल्मीकि समुदाय के कुछ गणमान्य लोगों की मौजूदगी में आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गांव में किसी के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा रहा। पंचायत ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिए जाने का आरोप भी लगाया। पंचायत के जवाब में सबसे महत्वपूर्ण बात पानी की सुविधा को लेकर सामने आई। सरपंच मीना अकालगढ़ के अनुसार गांव के बाहरी हिस्से में स्थित एक प्राइवेट कॉलोनी में वाल्मीकि समुदाय से संबंधित दो परिवार रहते हैं। उनके अनुसार करीब 10 परिवारों को पानी की सुविधा से वंचित रखने का दावा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। पंचायत का कहना है कि संबंधित परिवारों अथवा आरोप लगाने वाले बसपा नेताओं की ओर से पानी के कनेक्शन के लिए पंचायत से कोई संपर्क भी नहीं किया गया।
पानी की पाइप लाइन पहुंची, लेकिन सड़क पार करने की अनुमति बनी अड़चन
सरपंच ने बताया कि वाटर सप्लाई की पाइप लाइन कॉलोनी के बाहर तक पहुंचाई जा चुकी है। सड़क के दूसरी ओर पाइप लाइन ले जाने के लिए सड़क खोदने की अनुमति पी.डब्ल्यू.डी. से लेना जरूरी है। इसी प्रक्रिया के कारण काम अभी पूरा नहीं हो पाया है। पंचायत का यह भी कहना है कि जिन दो परिवारों को इस समस्या से प्रभावित बताया जा रहा है, उनके घरों में सबमर्सिबल बोर मौजूद हैं। ऐसे में पंचायत के अनुसार इसे जातीय भेदभाव के कारण पेयजल सुविधा रोकने का मामला बताना उचित नहीं है।
सवाल सिर्फ पंचायत का नहीं, प्राइवेट कॉलोनी की जिम्मेदारी भी
इस पूरे विवाद में पंचायत ने प्राइवेट कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया है। पंचायत सदस्यों परमजीत कौर, संदीप कौर, जसविंदर सिंह, गुरदीप सिंह और चमन लाल ने कहा कि प्राइवेट कॉलोनी में पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के आवश्यक प्रबंध करना मुख्य रूप से कॉलोनाइजर की जिम्मेदारी होती है। पंचायत का तर्क है कि पंचायतों का अपना सीमित अधिकार क्षेत्र भी होता है, जिसके कारण कई बार ऐसे मामलों में तुरंत काम करवाना संभव नहीं होता। यहीं से जनता का सवाल भी सामने आता है—अगर किसी कॉलोनी में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं, तो जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था क्या है? क्या कॉलोनी विकसित करते समय ही पानी, सड़क और सीवरेज जैसी सुविधाओं की जांच सुनिश्चित नहीं होनी चाहिए? यह सवाल केवल अकालगढ़ तक सीमित नहीं, बल्कि तेजी से विकसित हो रही प्राइवेट कॉलोनियों से जुड़े व्यापक मुद्दे की ओर भी इशारा करता है।
विकास कार्यों को बताया सभी वर्गों के लिए
पंचायत सदस्यों ने कहा कि गांव में करवाए जा रहे विकास कार्य किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं। उनका दावा है कि इन कार्यों का लाभ सभी वर्गों के लोगों को मिल रहा है। पंचायत ने विशेष रूप से वाल्मीकि समुदाय की अधूरी धर्मशाला का काम प्राथमिकता के आधार पर करवाने का हवाला देते हुए कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि पंचायत की नीयत में किसी प्रकार का जातीय भेदभाव नहीं है।
वाल्मीकि समाज के लोग भी आये सरपंच के पक्ष में

गांव के वाल्मीकि समुदाय से संबंधित बूटा राम, राकेश कुमार और लवप्रीत ने भी पंचायत के पक्ष में बात रखते हुए कहा कि गांव में लंबे समय से विभिन्न समुदायों के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते आए हैं और एक-दूसरे के दुख-सुख में शामिल होते हैं। उन्होंने भी धर्मशाला के काम को पंचायत की ओर से किए गए सकारात्मक प्रयास के तौर पर पेश किया।
आरोप और जवाब के बीच अब असली मुद्दा समाधान का
गौरतलब है कि इससे पहले बहुजन समाज पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया था कि वाल्मीकि समुदाय के करीब 10 परिवारों के साथ जातीय आधार पर भेदभाव किया जा रहा है और उन्हें पानी, सड़क तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। पार्टी ने एस.डी.एम. फगवाड़ा को मांगपत्र देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की थी। अब पंचायत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ऐसे में इस विवाद में अगला महत्वपूर्ण पहलू यही रहेगा कि प्रभावित बताए जा रहे परिवारों की वास्तविक स्थिति क्या है, पानी की पाइप लाइन का काम किस स्तर पर लंबित है और संबंधित कॉलोनी में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की कानूनी जिम्मेदारी किसकी बनती है। पंचायत ने आम लोगों से भी अपील की कि प्राइवेट कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदते समय केवल कीमत और स्थान को ही न देखें, बल्कि पानी, सीवरेज, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति तथा उनकी जिम्मेदारी के बारे में भी पूरी जानकारी हासिल करें। पंचायत ने कहा कि अकालगढ़ में भाईचारे और आपसी सद्भाव की परंपरा कायम है और विकास कार्यों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा।
इस मौके पर ओम प्रकाश, महिंदर सिंह, परमजीत सिंह, रोशन लाल, सतनाम सिंह, तलविंदर सिंह, संतोष सिंह, अवतार सिंह, सुच्चा सिंह, ब्रिज शरण आदि मौजूद थे।
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