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चंडीगढ़। गुलजार सिंह की मौत का मामला पंजाब की राजनीति में लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी मामले को लेकर पंजाब कांग्रेस आज वित्त मंत्री और विधायक हरपाल सिंह चीमा के चंडीगढ़ स्थित आवास की ओर मार्च कर रही है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट की अगुवाई में होने वाले इस प्रदर्शन में पार्टी चीमा के खिलाफ कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि गुलजार सिंह ने अपने क्षेत्र की समस्या को लेकर चीमा के सामने सवाल उठाया था और उसके बाद जिस तरह का घटनाक्रम सामने आया, उसकी राजनीतिक जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती। दूसरी ओर, सरकार की ओर से मामले में नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है और जांच जारी है।

कांग्रेस का यह प्रदर्शन ऐसे समय हो रहा है जब आम आदमी पार्टी ने हरपाल सिंह चीमा को अपनी Political Affairs Committee (PAC) में शामिल किया है। पार्टी की शीर्ष राजनीतिक कमेटी में चीमा को जगह मिलने को उनके बढ़ते राजनीतिक कद के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि गुलजार सिंह प्रकरण के बीच यह फैसला विपक्ष के निशाने पर आ गया है। सवाल चीमा को संगठन में जिम्मेदारी देने के अधिकार का नहीं है, बल्कि उस समय का है जब यह जिम्मेदारी दी गई है। जिस विधानसभा क्षेत्र में गुलजार सिंह का मामला सामने आया, उसके विधायक हरपाल चीमा ही हैं। ऐसे में कांग्रेस अब इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा रही है।

गुलजार सिंह ने चीमा के सामने किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र या किसी सामान्य राजनीतिक मुद्दे को लेकर सवाल नहीं उठाया था। वह दिड़बा के मतदाता थे और अपने ही विधायक के सामने अपने गांव में नशे की समस्या को लेकर बात रख रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपने परिवार पर नशे के असर का भी जिक्र किया था। आम आदमी पार्टी जब राजनीति में आई थी तो उसने जनता को अपने चुने हुए विधायकों, सांसदों और मंत्रियों से सवाल करने के अधिकार को अपनी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। ऐसे में गुलजार सिंह का अपने विधायक से सवाल करना उसी लोकतांत्रिक अधिकार के तहत देखा जाना चाहिए। इसके बाद उनके साथ हुए कथित घटनाक्रम और उनकी मौत ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया कि स्थानीय स्तर पर उनकी शिकायत और उनके साथ हुए व्यवहार को किस तरह लिया गया।

गुलजार सिंह की मौत के मामले में पुलिस ने सरपंच सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हरपाल सिंह चीमा का नाम FIR में आरोपी के तौर पर नहीं है। इसलिए सीधे तौर पर उनकी आपराधिक भूमिका तय करना जांच का विषय है। लेकिन राजनीतिक स्तर पर उनकी स्थिति अलग है। वह उसी क्षेत्र के विधायक हैं जहां घटना से जुड़े लोग और पूरा घटनाक्रम सामने आया। गांवों में सरपंचों और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं का अपने क्षेत्र के विधायक तथा सत्ताधारी नेतृत्व से संपर्क रहता है। ऐसे में मामले ने स्थानीय राजनीतिक तंत्र की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

यही वजह है कि कांग्रेस आज सीधे चीमा के आवास की ओर मार्च कर रही है। पार्टी इसे केवल एक व्यक्ति के खिलाफ प्रदर्शन के रूप में नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही के मुद्दे के रूप में पेश कर रही है। कांग्रेस की मांग है कि मामले में निष्पक्ष जांच हो और अगर किसी भी स्तर पर राजनीतिक प्रभाव या सत्ता से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई की जाए। प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस सरकार को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि गुलजार सिंह की मौत का मामला केवल FIR में नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं, AAP की ओर से चीमा को PAC में शामिल करने का फैसला इस पूरे विवाद में नया राजनीतिक मोड़ लेकर आया है। अगर पार्टी को लगता है कि चीमा की इस मामले में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है, तो उन्हें संगठन में जिम्मेदारी देना उसके लिए सामान्य राजनीतिक फैसला हो सकता है। लेकिन विपक्ष इसे इसी आधार पर सरकार के खिलाफ मुद्दा बना रहा है कि जब चीमा के अपने विधानसभा क्षेत्र में इतनी गंभीर घटना हुई और उनकी मौजूदगी में गुलजार सिंह ने सवाल उठाया था, तब उन्हें बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी देने के बजाय क्या सरकार को पहले मामले की जांच और राजनीतिक जवाबदेही को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए थी।

गुलजार सिंह प्रकरण ने एक तरफ पंजाब में नशे की समस्या को लेकर सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए हैं, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के स्थानीय तंत्र की भूमिका भी बहस में आ गई है। खासकर तब, जब सवाल पूछने वाला व्यक्ति विपक्ष का नेता नहीं बल्कि उसी विधानसभा क्षेत्र का एक आम मतदाता था। ऐसे में आज होने वाला कांग्रेस का मार्च इस मामले को विधानसभा क्षेत्र से निकालकर सीधे पंजाब की सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव के केंद्र में ले आया है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार कांग्रेस के प्रदर्शन और उठाए जा रहे सवालों का किस तरह जवाब देती है। गुलजार सिंह की मौत से जुड़े आरोपों की सच्चाई जांच से सामने आएगी, लेकिन राजनीतिक स्तर पर यह मामला अब साफ तौर पर चीमा की भूमिका, दिड़बा जो कि सीएम भगवंत मान के अपने लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, वहां के स्थानीय राजनीतिक तंत्र और सरकार की जवाबदेही का मुद्दा बन चुका है। एक तरफ कांग्रेस चीमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर उनके घर तक पहुंच रही है, दूसरी तरफ AAP ने उसी दौरान उन्हें पार्टी की शीर्ष राजनीतिक कमेटी में जगह देकर अपना भरोसा जाहिर किया है। यही विरोधाभास इस पूरे मामले को पंजाब की मौजूदा राजनीति में और महत्वपूर्ण बना रहा है।


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