बाड़ियां कलां में भाजपा-बसपा समर्थकों के बीच बढ़ा विवाद, पुलिस ने संभाला मोर्चा
होशियारपुर। जिले के बाड़ियां कलां गांव में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए जाने की घटना को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान बुधवार को माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब मौके पर पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता विजय सांपला के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई हो गई। इस दौरान माइक लगने से सांपला के घायल होने की सूचना है। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और सांपला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने के बाद शुरू हुआ विरोध
बाड़ियां कलां में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा को मंगलवार तड़के पत्थर/ईंटों से नुकसान पहुंचाए जाने की घटना सामने आई थी। पुलिस के अनुसार प्रतिमा के चेहरे और हाथ की एक अंगुली को नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद विभिन्न संगठनों और स्थानीय लोगों में रोष फैल गया तथा मौके पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। पुलिस मामले की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
सांपला के पहुंचते ही बढ़ा तनाव
विजय सांपला भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ घटनास्थल पर पहुंचे थे। रिपोर्टों के अनुसार वहां मौजूद बसपा समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। इसी दौरान सांपला भी भीड़ के बीच आ गए और उनके साथ हाथापाई हुई। इस दौरान माइक से चोट लगने के कारण वह घायल हो गए।
घटना के बाद पुलिस ने मौके पर हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित किया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि संवेदनशील सामाजिक प्रतीकों से जुड़ी घटनाओं के बाद विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक टकराव में बदलने से रोकने के लिए प्रशासन की तैयारियां कितनी प्रभावी हैं। फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखने और प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने वाले वास्तविक आरोपियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने की है। पुलिस की जांच और सीसीटीवी फुटेज से आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की घटना अपने आप में संवेदनशील है, लेकिन उसके विरोध में होने वाला प्रदर्शन यदि राजनीतिक या सामाजिक टकराव का रूप ले लेता है तो मूल मुद्दा पीछे छूट जाता है। अब सबसे जरूरी सवाल यही है कि प्रतिमा को नुकसान किसने पहुंचाया, उसके पीछे वास्तविक कारण क्या था और प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प की नौबत क्यों आई? इन सवालों का जवाब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से सामने आना चाहिए।
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