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‘दूर बैठा सज्जण’ के लेखक सतीश सिंह निम्माणा।

62 कविताओं में इश्क, औरत, दोस्ती से लेकर पंजाबी विरासत तक की कहानी; युवा शायर सतीश सिंह निम्माणा ने साहित्य से जुड़ने का दिया संदेश

फगवाड़ा — आज जब मोबाइल स्क्रीन ने किताब के पन्नों की जगह ले ली है और बच्चों व युवाओं का साहित्य, पत्रिकाओं और पुस्तकों से रिश्ता लगातार कमजोर होता दिखाई दे रहा है, ऐसे समय में किसी युवा लेखक की पुस्तक का चर्चा में आना महज साहित्यिक गतिविधि नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक माहौल की ओर भी इशारा करता है। युवा शायर सतीश सिंह निम्माणा की हाल ही में रिलीज हुई पुस्तक ‘दूर बैठा सज्जण’ इसी संदर्भ में साहित्यिक और सिख हलकों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पुस्तक में करीब 62 कविताओं को पांच भागों में विभाजित किया गया है। इनमें इश्क, औरत, दुनिया, दोस्ती और पंजाबी विरासत जैसे विषयों को अलग-अलग भावनात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक की खासियत यह है कि कविताएं केवल कल्पना की दुनिया तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी, रिश्तों, अनुभवों और मानवीय भावनाओं से जुड़ती नजर आती हैं।

किताब के पन्नों में दिखाई देती है बदलती जिंदगी

‘दूर बैठा सज्जण’ का ‘औरत’ भाग विशेष रूप से संवेदनशील विषयों को सामने लाता है। इसमें कुल नौ कविताएं हैं, जिनमें महिला के दर्द, भावनाओं और उसके जीवन के विभिन्न पहलुओं को शायर ने संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। वहीं ‘पंजाबी विरासत’ भाग में ‘चाय’, ‘घड़ा’, ‘सुक्के पत्ते’, ‘फोन’, ‘शीशा’, ‘गल्लां प्यार दीयां’ और ‘व्याह दा कार्ड’ जैसी कविताएं बदलते समय और पंजाबी जीवन-शैली के बीच बन रहे अंतर को महसूस करने का अवसर देती हैं। खास बात यह है कि यहां विरासत केवल पुराने प्रतीकों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि फोन जैसे आधुनिक जीवन के हिस्से को भी कविता का विषय बनाया गया है।

शायर का सफर किताब तक कैसे पहुंचा?

क्वालीफाइड फार्मासिस्ट सतीश सिंह निम्माणा ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट के साथ-साथ वकालत की पढ़ाई भी कर रहे हैं। युवावस्था से ही पढ़ने और लिखने में रुचि रखने वाले निम्माणा के पसंदीदा शायरों में शिव कुमार बटालवी भी शामिल रहे हैं। उनकी रचनाओं में भी जिंदगी से जुड़े जज्बातों और मानवीय संवेदनाओं की झलक दिखाई देती है। यह उनकी पहली पुस्तक नहीं है। वर्ष 2025 में उनकी पुस्तक ‘सच की पगडंडियां’ भी पाठकों के सामने आ चुकी है। निम्माणा के अनुसार किसी लेखक के लिए उसकी रचना को पाठकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलना सबसे सुखद अनुभवों में से एक होता है। उनका कहना है कि इस समय भी उनके पास चार-पांच पुस्तकों के लिए सामग्री तैयार है। आने वाले वर्ष में इनमें से चुनिंदा कविताओं को शामिल करते हुए एक और पुस्तक पाठकों के सामने लाने की योजना है।

असली सवाल सिर्फ एक किताब का नहीं

‘दूर बैठा सज्जण’ की चर्चा के बीच बड़ा सवाल यह भी है कि क्या आज की युवा पीढ़ी साहित्य से वास्तव में दूर हो रही है, या साहित्य को उसके बदलते पढ़ने के तरीके के साथ खुद को बदलने की जरूरत है? मोबाइल और डिजिटल माध्यमों ने पढ़ने की आदतों को जरूर बदला है, लेकिन मानवीय भावनाओं, रिश्तों, प्रेम, संघर्ष और अपनी जड़ों को समझने की जरूरत आज भी उतनी ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इन विषयों तक पहुंचने का माध्यम बदल गया है। ऐसे में निम्माणा की युवाओं से साहित्य के साथ रिश्ता मजबूत करने की अपील महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका कहना है कि साहित्य की विभिन्न विधाओं को पढ़ने और समझने से इंसान को अपनी जिंदगी, समाज और विरासत को अधिक गहराई से समझने का अवसर मिलता है।


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