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🔴 यहाँ क्लिक करके D-News Watch के मुख्य पृष्ठ (Home) पर जाएँलुधियाना के ऐतिहासिक दरेसी मैदान में होगा पंजाब के सबसे ऊंचे रावण का दहन, धार्मिक आयोजन के साथ जुड़ेंगे राजनीतिक और सामाजिक संदेश
लुधियाना, 20 अक्टूबर। विजयदशमी के अवसर पर आज लुधियाना का ऐतिहासिक दरेसी मैदान एक बार फिर दशहरे के भव्य आयोजन का गवाह बनेगा। हमेशा की तरह 121 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन तो इस समारोह का मुख्य आकर्षण होगा ही, लेकिन वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे ने इस बार के आयोजन को धार्मिक उत्सव से आगे बढ़ाकर राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
लुधियाना के दरेसी मैदान में दशहरे का आयोजन इस शहर की पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है। हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचते हैं। विशाल पुतला, रामलीला की परंपरा और मेले का माहौल इसे शहर के प्रमुख सार्वजनिक आयोजनों में शामिल करता है। इस बार 121 फुट ऊंचे रावण के कारण आयोजन को लेकर लोगों में विशेष उत्साह है।
दरेसी मैदान की पहचान: दशकों पुरानी परंपरा और भव्य आयोजन
लुधियाना का दरेसी मैदान दशहरा समारोहों के लिए विशेष पहचान रखता है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक जिंदगी का भी हिस्सा है। परिवारों का मेले में पहुंचना, रामलीला के प्रसंगों को देखना और रावण दहन के क्षण का इंतजार करना इस परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाता रहा है।
इस बार 121 फुट ऊंचा रावण समारोह का प्रमुख आकर्षण है। इसके साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी किया जाएगा। पुतलों के निर्माण में कारीगरों की मेहनत और पारंपरिक कला की भूमिका इस आयोजन को एक अलग आयाम देती है।
दशहरे का संदेश: बदी पर नेकी की विजय
विजयदशमी भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक है। यह पर्व अहंकार, अन्याय और बुराई के अंत तथा सत्य और मर्यादा की स्थापना का संदेश देता है। हर वर्ष रावण के पुतले का दहन इसी मान्यता के साथ किया जाता है कि समाज में बुराइयों के खिलाफ संघर्ष जारी रहना चाहिए।
आज के संदर्भ में इस संदेश का महत्व और बढ़ जाता है। नशे की समस्या, अपराध, भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य से जुड़ी चुनौतियां समाज के सामने गंभीर सवाल खड़े करती हैं। ऐसे में दशहरे की सार्थकता केवल प्रतीकात्मक दहन में नहीं, बल्कि उन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ ठोस प्रयासों में भी है, जो परिवारों और समाज को प्रभावित करती हैं।
अमित शाह के दौरे से बढ़ा आयोजन का राजनीतिक महत्व
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आज दरेसी मैदान में मौजूदगी इस आयोजन का एक प्रमुख पहलू है। उनके दौरे के कारण लुधियाना का दशहरा समारोह राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में है। पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था लंबे समय से महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे बने हुए हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अमित शाह दोपहर में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मिलेंगे, जिनकी 13 अक्टूबर को कथित तौर पर अवैध नशीली दवाओं की बिक्री का विरोध करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद संगरूर जिले के गांव तूर बनजारा में गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात करेंगे, जिनकी मौत राज्य सरकार से नशे की सप्लाई को लेकर सवाल उठाने के बाद कथित उत्पीड़न के आरोपों के बीच हुई थी। इसके अलावा गुरदासपुर-बटाला क्षेत्र के गांव मरी पनवां में बिक्रमजीत सिंह के परिवार से भी मिलेंगे, जिनकी हत्या इलाके में नशे के कारोबार के विरोध के बीच हुई है। इन मुलाकातों को पंजाब में नशे के मुद्दे और इससे जुड़े परिवारों की चिंताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नशे के खिलाफ अभियान को दशहरे के प्रतीकात्मक संदेश से जोड़ने की चर्चा इस आयोजन को एक अतिरिक्त सामाजिक संदर्भ देती है। रावण दहन जैसे लोकप्रिय धार्मिक अवसर के माध्यम से नशे के विरुद्ध संदेश व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच सकता है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति पर भी नजर
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नशा, कानून-व्यवस्था और युवाओं का भविष्य राजनीतिक विमर्श के महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे समय में केंद्रीय गृह मंत्री का राज्य के एक बड़े सार्वजनिक आयोजन में शामिल होना भाजपा के लिए अपनी राजनीतिक सक्रियता और प्राथमिकताओं को सामने रखने का अवसर भी है।
फिर भी, इस दौरे को किसी संभावित चुनावी गठबंधन या सीटों के बंटवारे का निश्चित संकेत मानना उचित नहीं होगा। इसका व्यापक राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में पार्टी की गतिविधियों, नशे के मुद्दे पर होने वाली कार्रवाई और पंजाब में उसके संगठनात्मक प्रयासों से स्पष्ट होगा।
दरेसी मैदान में आज 121 फुट ऊंचे रावण का दहन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। अमित शाह की मौजूदगी इस आयोजन को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा से भी जोड़ सकती है। लेकिन इस दशहरे का सबसे बड़ा संदेश उस समय सार्थक होगा, जब समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ वास्तविक बदलाव दिखाई देगा।
रावण का पुतला जलना परंपरा है, लेकिन नशे के जाल से युवाओं को बचाना, अपराध पर अंकुश लगाना और परिवारों को सुरक्षित भविष्य देना एक सतत जिम्मेदारी है। दरेसी मैदान की विजयदशमी इस बार धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक संदेश को एक साथ सामने ला रही है।
पंजाब में इस बार विजयदशमी केवल रावण दहन तक सीमित न रहे, बल्कि उस नशे की बुराई को समाप्त करने का संकल्प भी हो, जो समाज के वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी को पतन की तरफ धकेल रही है।
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