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🔴 यहाँ क्लिक करके D-News Watch के मुख्य पृष्ठ (Home) पर जाएँकहा: मंडियों में अभी करीब 40 प्रतिशत धान की आवक, आने वाले दिनों में बढ़ सकती है परेशानी
सरकार से हस्तक्षेप की मांग, वजीदोवाल स्थित वेयरहाउस के गोदाम इस्तेमाल करने का दिया सुझाव
फगवाड़ा: फगवाड़ा में राइस मिल मालिकों की हड़ताल के चलते धान की लिफ्टिंग प्रभावित होने की आशंका पर जिला कपूरथला आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान एवं मार्केट कमेटी फगवाड़ा के पूर्व चेयरमैन नरेश भारद्वाज ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि धान की खरीद के बाद मंडियों से फसल उठाने की प्रक्रिया धीमी पड़ने या रुकने से किसानों, आढ़तियों और मजदूरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नरेश भारद्वाज ने कहा कि अभी मंडियों में धान की करीब 40 प्रतिशत आवक ही हुई है, जबकि बड़ी मात्रा में धान आने वाले दिनों में मंडियों में पहुंचना बाकी है। ऐसे में यदि राइस मिल मालिकों की हड़ताल लंबी खिंचती है, तो मंडियों में बोरियों के ढेर लगने, जगह की कमी होने और खरीद व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने पंजाब सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि राइस मिल मालिकों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए, ताकि धान की लिफ्टिंग दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो सके।
नरेश भारद्वाज के अनुसार, राइस मिल मालिकों की मुख्य समस्या पिछली खेप के चावल की डिलीवरी और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर है। उनके मुताबिक, मिलरों के पास पिछली खेप का लगभग 350 गाड़ियों के बराबर चावल लंबित है। सरकार की ओर से इस स्टॉक को 31 अक्टूबर तक जमा कराने अथवा निर्धारित दर के अनुसार लगभग 4,200 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान करने की शर्त को लेकर मिलर असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि मौजूदा बाजार भाव के मुकाबले यह शर्त आर्थिक रूप से कठिन साबित हो रही है।
भारद्वाज ने कहा कि इस मामले में पहले भी संबंधित अधिकारियों और मिल मालिकों के बीच बातचीत हुई थी। कुछ कमियों को दूर करने के लिए सरकार और मिल मालिकों ने अपने-अपने स्तर पर कदम भी उठाए, लेकिन इसके बावजूद लंबित चावल की डिलीवरी के लिए वजीदोवाल स्थित गोदाम में स्टॉक रखने की अनुमति नहीं मिल पा रही है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस विवाद को बातचीत के जरिए जल्द सुलझाया जाए, ताकि धान के मौजूदा सीजन में किसी प्रकार की बाधा न आए।
वजीदोवाल के गोदामों में 700 गाड़ियों के बराबर भंडारण की क्षमता
नरेश भारद्वाज ने कहा कि फगवाड़ा के निकट गांव वजीदोवाल स्थित वेयरहाउस के गोदामों का इस्तेमाल इस समस्या के समाधान के लिए किया जा सकता है। उनके मुताबिक, वहां लगभग 700 गाड़ियों के बराबर चावल रखने की क्षमता उपलब्ध है, जबकि फगवाड़ा की राइस मिलों में करीब 350 गाड़ियों के बराबर स्टॉक पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वजीदोवाल स्थित गोदामों में चावल रखने की अनुमति देने की संभावनाओं पर विचार करे, तो मिलों में जगह खाली हो सकती है। इससे पिछली खेप की डिलीवरी का रास्ता खुलने के साथ-साथ नई धान की फसल की मिलिंग और लिफ्टिंग की प्रक्रिया को भी सुचारू बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता और गोदामों की वास्तविक उपलब्ध क्षमता की संबंधित विभागों द्वारा पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
किसानों, आढ़तियों और मजदूरों पर पड़ सकता है असर
भारद्वाज ने कहा कि धान का सीजन अपने महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर रहा है। यदि राइस मिलों में चावल की डिलीवरी और धान की लिफ्टिंग के बीच तालमेल नहीं बनता, तो मंडियों में बोरियों के ढेर लग सकते हैं। इससे किसानों को अपनी फसल उतारने के लिए जगह मिलने में दिक्कत होगी, आढ़तियों का काम प्रभावित होगा और मंडियों में काम करने वाले मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि धान की खरीद व्यवस्था केवल किसानों या राइस मिल मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आढ़तियों, पल्लेदारों, ट्रांसपोर्टरों और मंडियों से जुड़े अनेक लोगों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। इसलिए इस विवाद का समाधान इस तरह निकाला जाना चाहिए कि खरीद और उठान की व्यवस्था बाधित न हो तथा सभी संबंधित पक्षों के हित सुरक्षित रह सकें।
सरकार प्राथमिकता के आधार पर निकाले समाधान
जिला कपूरथला आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान एवं फगवाड़ा मंडी के प्रधान नरेश भारद्वाज ने पंजाब सरकार से अपील की कि राइस मिल मालिकों के साथ जल्द बैठक कर उनकी मांगों और लंबित चावल की डिलीवरी से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि वजीदोवाल स्थित वेयरहाउस के गोदामों के इस्तेमाल सहित सभी व्यावहारिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि हड़ताल समाप्त हो और मंडियों में धान की खरीद, भंडारण तथा लिफ्टिंग बिना रुकावट जारी रह सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय रहते समाधान निकालना बेहद जरूरी है, क्योंकि धान की आवक बढ़ने के साथ मंडियों में जगह की समस्या गंभीर हो सकती है। सरकार, राइस मिल मालिकों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही किसानों, आढ़तियों, मजदूरों और मंडियों से जुड़े अन्य लोगों को संभावित परेशानी से बचाया जा सकता है।
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