सुरक्षा परिषद और बहुपक्षीय संस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग; विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने पर दिया जोर
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में सुधार की जरूरत को प्रमुखता से उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो देश इन सुधारों को रोक रहे हैं, वे वास्तव में संयुक्त राष्ट्र की परवाह नहीं करते, बल्कि अपने हितों के लिए इस वैश्विक संस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं।
‘सुधार सर्वसम्मति से नहीं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय हों’
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की प्रक्रिया को लेकर कहा कि वैश्विक संस्थाओं में बदलाव को केवल सर्वसम्मति के नाम पर अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता। सुधार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से तय किए जाने चाहिए, ताकि संयुक्त राष्ट्र आज की दुनिया की वास्तविक परिस्थितियों और जरूरतों का प्रतिनिधित्व कर सके।
विकासशील देशों की आवाज को मिले अधिक महत्व
भारत के विदेश मंत्री ने विकासशील देशों यानी ‘ग्लोबल साउथ’ की भूमिका को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया जिन बड़े आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय संकटों से गुजर रही है, उनके समाधान से जुड़े फैसलों में विकासशील देशों की भागीदारी और उनकी आवाज को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त का संकट
जयशंकर ने दुनिया के सामने मौजूद ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त के चार बड़े संकटों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और स्पष्ट नियम जरूरी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता संकट के समय पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। इसलिए आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना समय की जरूरत है।
समुद्र में जहाज और नाविकों की सुरक्षा भी चिंता का विषय
विदेश मंत्री ने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। खाड़ी, लाल सागर और काले सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नाविकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। भारत और लाइबेरिया की अगुवाई में ‘जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए मित्र देशों का समूह’ बनाने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों पर जहाजों और नाविकों की सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करना है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक तनावों को कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों, मानदंडों और कानूनों का सम्मान जरूरी है। देशों के बीच तय नियमों का पालन ही वैश्विक व्यवस्था में स्थिरता और संतुलन कायम करने का आधार बन सकता है।
भारत का स्पष्ट संदेश
जयशंकर के संबोधन में भारत की ओर से तीन प्रमुख संदेश सामने आए—संयुक्त राष्ट्र में वास्तविक सुधार, वैश्विक फैसलों में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर आधारित विश्व व्यवस्था। इसके साथ भारत ने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त की सुरक्षा तथा समुद्री व्यापार की सुरक्षा को भी वैश्विक स्थिरता से जोड़कर सामने रखा।
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