स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने देशवासियों को दी शुभकामनाएं, स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन; ऑपरेशन सिंदूर और आत्मनिर्भर भारत का भी किया उल्लेख
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र के नाम संबोधन में देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता के बाद लंबी यात्रा तय की है और अब देश का लक्ष्य वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र का निर्माण करना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने अंत्योदय की भावना के साथ गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के कल्याण को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया।
राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल सहित स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों को याद किया। उन्होंने विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों तथा विस्थापित परिवारों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भर भारत पर जोर
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने भारत की आर्थिक प्रगति, डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाईवे, रेलवे, जलमार्ग, हवाई संपर्क और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं के विस्तार से देश की विकास यात्रा को नई गति मिली है।
उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने तथा वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को महत्वपूर्ण बताया। गरीबों के लिए जनधन, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत और किसानों से जुड़ी योजनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया।
महिला और युवा शक्ति को बताया देश की ताकत
राष्ट्रपति मुर्मु ने महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी को भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
युवाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए राष्ट्रपति ने स्टार्टअप, स्वरोजगार, खेल, विज्ञान और अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ और सशस्त्र बलों के साहस की सराहना
राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा में भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना करते हुए उनके साहस और शौर्य को नमन किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ता और सुरक्षा बलों की क्षमता को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही नक्सलवाद के खिलाफ मिली प्रगति को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कारगिल विजय दिवस को याद किया। साथ ही आतंकवाद को समर्थन देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले को देश और विशेषकर किसानों के हित में निर्णायक कदम बताया।
पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक भूमिका
राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी बताते हुए नवीकरणीय ऊर्जा, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और LiFE जैसे अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने देशवासियों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान देने की अपील की।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत शांति, संवाद, सहयोग और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ विश्व समुदाय के साथ आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश के अंत में कहा कि राष्ट्र केवल उसकी भूमि नहीं, बल्कि उसके लोग हैं। हर नागरिक का विकास, सम्मान और कल्याण ही विकसित भारत के संकल्प की वास्तविक कसौटी है। उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर 2047 तक विकसित और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
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