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मुंबई (डी-न्यूज़ वॉच)। भारतीय सिनेमा और संगीत जगत में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं, जो समय की सीमाओं से परे चली जाती हैं। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ भी ऐसी ही एक अमर धरोहर है। 31 जुलाई 1980 को रफ़ी साहब इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनके गीत आज भी करोड़ों दिलों की धड़कनों में जीवित हैं।

24 दिसंबर 1924 को पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह में जन्मे रफ़ी साहब ने अपने गायन से हर भावना को स्वर दिया। प्रेम, विरह, भक्ति, देशभक्ति, हास्य और सूफ़ियाना रंग—शायद ही कोई ऐसा भाव हो, जिसे उन्होंने अपनी आवाज़ में जीवंत न किया हो। उनकी यही बहुमुखी प्रतिभा उन्हें भारतीय संगीत इतिहास के सबसे महान पार्श्व गायकों में स्थान दिलाती है।

रफ़ी साहब ने अपने लंबे संगीत सफ़र में हज़ारों गीत गाए और लगभग हर बड़े संगीतकार तथा अभिनेता के लिए अपनी आवाज़ दी। उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत की गहराई भी थी और आम श्रोता के दिल तक पहुँचने वाली सहजता भी। यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।

आज, उनकी 46वीं पुण्यतिथि पर देश ही नहीं, विदेशों में भी अनेक संगीत प्रेमी और सांस्कृतिक संस्थाएँ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रही हैं। उनकी याद में संगीत संध्याओं और विशेष कार्यक्रमों का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि रफ़ी साहब केवल एक गायक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं।

तकनीक बदल गई, संगीत का स्वरूप बदल गया, लेकिन रफ़ी साहब की आवाज़ का जादू आज भी वैसा ही है। नई पीढ़ी भी उनके गीत सुनकर उसी भावनात्मक दुनिया में खो जाती है, जिसमें कभी उनके समकालीन श्रोता खोया करते थे।

रफ़ी साहब ने एक बार कहा था कि संगीत इंसानों को जोड़ने का सबसे सुंदर माध्यम है। शायद यही कारण है कि उनकी आवाज़ आज भी भाषा, धर्म और पीढ़ियों की सीमाओं से ऊपर उठकर हर दिल में अपनी जगह बनाए हुए है।

डी-न्यूज़ वॉच की ओर से स्वर सम्राट मोहम्मद रफ़ी साहब को उनकी 46वीं पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।


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