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विशेष अगस्त कवर स्टोरी | न्यूज़ डेस्क

15 अगस्त 1947 की तारीख सुनते ही हमारे दिमाग में लाल किले की प्राचीर, लहराता तिरंगा और पंडित नेहरू का ऐतिहासिक भाषण याद आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस वक्त पूरा देश जश्न मना रहा था, उस वक्त कई ऐसी अनसुनी घटनाएं घट रही थीं, जिनके बारे में आज की नई पीढ़ी को लगभग ‘जीरो’ जानकारी है?

आज़ादी के इस महीने में आइए जानते हैं 1947 के उस ऐतिहासिक हफ्ते की 5 सबसे दिलचस्प और अनकही कहानियां…

​1. 15 अगस्त को पंडित नेहरू ने नहीं, बल्कि इस शख्स ने फहराया था लाल किले पर झंडा!

​हम सब बचपन से पढ़ते आए हैं कि 15 अगस्त को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर तिरंगा फहराया था। लेकिन असली सच थोड़ा अलग है!

​15 अगस्त 1947 को लाल किले पर कोई मुख्य झंडारोहण कार्यक्रम हुआ ही नहीं था। 15 अगस्त को सुबह ‘वाइसरॉय हाउस’ (आज का राष्ट्रपति भवन) में स्वतंत्र भारत की पहली सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हुआ था। इसके बाद शाम को इंडिया गेट पर झंडा फहराया गया।

पंडित नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से पहली बार तिरंगा 16 अगस्त 1947 की सुबह 8:30 बजे फहराया था, न कि 15 अगस्त को!

2. महात्मा गांधी 15 अगस्त को जश्न में शामिल क्यों नहीं थे? कहां थे ‘बापू’?

​जब 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि को पूरा देश ‘आज़ादी की पहली सुबह’ का जश्न मना रहा था, तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे! वे खुशियों के जश्न से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखली (अब बांग्लादेश में) में थे।

वहां भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़के हुए थे। गांधी जी उस रात 24 घंटे का उपवास रख रहे थे और प्रार्थना कर रहे थे कि देश में शांति स्थापित हो। उन्होंने कहा था— “जब मेरा देश टुकड़ों में बंट रहा हो और लोग आपस में लड़ रहे हों, तो मैं जश्न कैसे मना सकता हूँ?”

3. जिस रात देश आज़ाद हुआ, उस रात ऑल इंडिया रेडियो (AIR) पर क्या बजा था?
14 अगस्त की रात 11:55 बजे जब संसद भवन में सन्नाटा छाया था, तब ऑल इंडिया रेडियो पर एक सुरीली और गूंजती हुई आवाज़ ने पूरे देश का दिल छू लिया था।
वह आवाज़ थी मशहूर गायिका सुचेता कृपलानी (जो बाद में भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनीं) की। उन्होंने रात के ठीक 12 बजे से ठीक पहले ‘वंदे मातरम’ का गायन किया था। इसके तुरंत बाद पंडित नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण “Tryst with Destiny” (भाग्य से भेंट) दिया था।

4. रेडक्लिफ की वो ‘पेंसिल’: जिसने 2 दिन बाद (17 अगस्त) तय किया कि कौन भारत में रहेगा और कौन पाकिस्तान में!
आपको जानकर हैरानी होगी कि 15 अगस्त 1947 को किसी भी भारतीय को यह पता ही नहीं था कि भारत और पाकिस्तान की सीमा रेखा (Border) कहां से गुजरती है!
ब्रिटिश वकील सर सिरिल रेडक्लिफ को भारत-पाक बंटवारे की सीमा तय करने का काम दिया गया था। उन्होंने भारत आने से पहले कभी यह देश देखा तक नहीं था। उन्होंने जो ‘रेडक्लिफ लाइन’ खींची, उसका औपचारिक ऐलान 15 अगस्त को नहीं, बल्कि 17 अगस्त 1947 को किया गया था। यानी आज़ादी के 2 दिन बाद तक पंजाब और बंगाल के करोड़ों लोग असमंजस में थे कि वे किस देश के नागरिक हैं।

5. क्या आपको पता है? 15 अगस्त 1947 को भारत का अपना कोई ‘राष्ट्रगान’ ही नहीं था!
आज जब भी 15 अगस्त का नाम आता है, तो ‘जन गण मन’ हमारे रोंगटे खड़े कर देता है। लेकिन सच यह है कि 15 अगस्त 1947 के दिन भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रगान (National Anthem) था ही नहीं!
हालांकि, रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा ‘जन गण मन’ 1911 में ही लिखा जा चुका था, लेकिन इसे भारत के राष्ट्रगान के रूप में आधिकारिक तौर पर 24 जनवरी 1950 को (संविधान लागू होने से दो दिन पहले) अपनाया गया था। 1947 में आज़ादी के समय अलग-अलग देशभक्ति गीत जैसे ‘वंदे मातरम’ और ‘क़दम क़दम बढ़ाए जा’ गाए जाते थे।

💬 संपादक की कलम से…
आज़ादी सिर्फ एक तारीख या एक छुट्टी का दिन नहीं है, बल्कि यह उन लाखों बेनाम संघर्षों, आंसुओं और फैसलों का नतीजा है जिन्होंने आज के भारत की नींव रखी। आज की युवा पीढ़ी के लिए इतिहास के इन पन्नों को पलटना और समझना बेहद ज़रूरी है।
आपकी राय: इनमें से कौन सी बात आपको आज पहली बार पता चली? नीचे कमेंट बॉक्स में हमें ज़रूर बताएं और इस खबर को अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स में शेयर करके अपने दोस्तों का ज्ञान भी बढ़ाएं!

-दिगविंन्द्र राणा


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