* मजदूरों को न्याय मिलने तक संघर्ष रहेगा जारी : इंटक यूनियन
फगवाड़ा(डी-न्यूज़ वाच) लंबे समय से बंद पड़ी जेसीटी मिल की थापर कॉलोनी में रहने वाले हजारों मजदूरों ने रेजोल्यूशन प्रोफेशनल उमेश गर्ग (आरपी) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनका बकाया वेतन, भत्ते, पी.एफ. तथा अन्य देय राशि का पूरा निपटारा नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी कीमत पर कॉलोनी खाली नहीं करेंगे। मजदूरों ने बताया कि कुछ दिन पहले आरपी उमेश गर्ग की ओर से कॉलोनी खाली करने के नोटिस लगाए गए थे। शनिवार को आरपी के प्रस्तावित दौरे के दौरान भी मजदूरों ने उनका विरोध करते हुए रोष जताया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना अधिकारों का निपटारा किए बेघर करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मजदूरों ने आरोप लगाया कि आरपी ने कभी मिल को दोबारा चलाने में गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना था कि आरपी ने कॉटन प्लांट और टेपेटा प्लांट का सही ढंग से निरीक्षण तक नहीं किया, जबकि मिल में करोड़ों रुपये का तैयार कपड़ा, कच्चा माल, केमिकल, रंग और अन्य सामान खराब होकर बर्बाद हो गया। उनका आरोप है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो कंपनी की इतनी बड़ी क्षति नहीं होती। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मिल कर्मचारियों से दबाव और गुमराह करके एक जैसे इस्तीफे लिखवाए गए और कर्मचारियों की सहमति के बिना उन पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। अब उन्हें राजनीतिक दबाव के सहारे कॉलोनी खाली करने की धमकियां दी जा रही हैं। मजदूरों ने कहा कि यह केवल रोजगार का नहीं बल्कि उनके सम्मान और अस्तित्व का भी सवाल बन चुका है। मजदूरों ने बताया कि पिछले लगभग तीन वर्षों से उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला है। आर्थिक तंगी के कारण परिवारों का गुजारा मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, इलाज, दवाइयों और रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी उनके पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं की भी भारी कमी है तथा कई स्थानों पर बिजली और पेयजल की समस्या बनी हुई है। मजदूरों ने कहा कि आरपी द्वारा दिए सभी आश्वासन झूठे साबित हुए हैं।
मजदूरों के साथ अन्याय और उत्पीडऩ बर्दाश्त नहीं : इंटक प्रधान
उधर इंटक जेसीटी यूनियन के प्रधान धर्मेंद्र ने कहा कि मजदूरों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय और उत्पीडऩ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक कर्मचारी को उसका फुल एंड फाइनल भुगतान, पीएफ, बकाया वेतन और अन्य कानूनी अधिकार नहीं मिल जाते, तब तक इंटक कांग्रेस मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने सवाल किया कि हजारों मजदूरों को बेरोजगार करके मिल से निकालने के पीछे क्या आरपी का मिल की जमीन कार्पोरेट घरानों को बेचने का इरादा है? मिल मजदूरों ने भी इंटक प्रधान के साथ स्वर मिलाते हुए कहा कि पंजाब सरकार, जिला प्रशासन तथा एनसीएलटी हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाये। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे अपना कानूनी हक मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे और किसी भी दबाव में कॉलोनी खाली नहीं करेंगे।
नोटिस में है 114 करोड़ रुपए जमा करवाने की बात
हालांकि, थापर कॉलोनी में आरपी की ओर से चस्पा किए गए नोटिस में दावा किया गया है कि कर्मचारियों के ईपीएफ से संबंधित करीब 114 करोड़ रुपये ईपीएफओ के पास जमा करवा दिए गए हैं तथा आगे की प्रक्रिया संबंधित विभाग द्वारा पूरी की जानी है। नोटिस में कॉलोनी निवासियों से निर्धारित अवधि के भीतर मकान खाली करने का भी आग्रह किया गया है। आरपी की ओर से 20 जुलाई को जारी उक्त नोटिस की प्रतियां डिप्टी कमिश्नर कपूरथला अकाश बंसल, एसएसपी कपूरथला गौरव तूरा, एसपी फगवाड़ा माधवी शर्मा सहित एडीसी रणदीप सिंह हीर को भी भेजी गई थीं। नोटिस में कॉलोनी खाली कराने संबंधी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। हालांकि, 2 अगस्त तक भी थापर कॉलोनी में रहने वाले मजदूर अपने रुख पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक उनका फुल एंड फाइनल भुगतान तथा अन्य बकाया नहीं मिल जाता, तब तक वे कॉलोनी खाली नहीं करेंगे।
नियुक्त किये गए आरपी का पक्ष ज्ञात नहीं हो सका मगर निकट सूत्रों की तरफ से सभी आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन किया गया है।
बहरहाल आरपी और मजदूरों के बीच विवाद के चलते थापर कॉलोनी में तनातनी की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। इस मामले में प्रशासन की ओर से किसी नई कार्रवाई या आधिकारिक बयान की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी की नजरें अब प्रशासन और संबंधित प्राधिकरणों के अगले कदम पर टिकी हैं।
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