रागी-ढाडी जत्थों ने संगतों को नाम-बाणी व गुर इतिहास से जोड़ा
फगवाड़ा /राममूर्ति लाली: श्रीमान 108 ब्रह्म ज्ञानी संत बाबा दिलीप सिंह जी की 77वीं सालाना बरसी गुरुद्वारा बाबा राणा साहिब, गांव डुमेली में प्रबंधक कमेटी द्वारा ग्राम पंचायत एवं क्षेत्र भर की संगतों के सहयोग से बड़ी श्रद्धापूर्वक मनाई गई।
तीन दिवसीय समागम के पहले दिन श्री अखंड पाठ साहिब का शुभारंभ हुआ। रात्रि को धार्मिक दीवान सजाए गए, जिसमें ढाडी जत्था भाई गुरमेल सिंह बघाणा ने ढाडी वारों के माध्यम से संगतों को गुर इतिहास से जोड़ा।
दूसरे दिन सुबह ढाडी, कविशरी जत्थों एवं कथावाचकों द्वारा संगतों को गुरु यश श्रवण करवाया गया। रात के दीवान 9 से 11 बजे तक सजाए गए, जिस दौरान भाई मलकीत सिंह खान थियाड़ा के जत्थे ने संगतों को निहाल किया।
समागम के तीसरे एवं अंतिम दिन सुबह श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। जिसके पश्चात ढाडी जत्था भाई जतिंदर सिंह बैंस, भाई गुरप्रीत सिंह लांडरां एवं भाई जरनैल सिंह बैंस के ढाडी जत्थों द्वारा ढाडी वारों के माध्यम से गुर इतिहास श्रवण करवाया गया।
समागम के दौरान संत बाबा अमरजीत सिंह हरखोवाल, संत बाबा जोगिंदर सिंह डुमेली (श्री आनंदपुर साहिब) एवं संत बाबा हरदीप सिंह गुरुद्वारा कौलसर साहिब रिहाणा जट्टां ने संगतों को खुले दर्शन-दीदार देते हुए संत बाबा दिलीप सिंह जी के जीवन के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने संगतों को संत बाबा दिलीप सिंह जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
प्रबंधकों की ओर से संत-महापुरुषों, रागी-ढाडी-कविशरी जत्थों, सहयोगियों एवं सेवादारों को गुरु बख्शीश सिरोपे भेंट किए गए। चाय-पकौड़े, ठंडे-मीठे जल की छबीलें एवं गुरु का लंगर अटूट छकाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र भर से संगतें नतमस्तक होने के लिए पहुंचीं।
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