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🔴 यहाँ क्लिक करके D-News Watch के मुख्य पृष्ठ (Home) पर जाएँकौमी सेवक रामलीला कमेटी की चौथी नाईट का आयोजन, पवन कुमार कालड़ा ने कहा—रामायण की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए प्रासंगिक
फगवाड़ा, 15 अक्टूबर। रामलीला केवल धार्मिक आस्था का मंच नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को कर्तव्य, मर्यादा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी है। भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग में जहां एक ओर पारिवारिक संबंधों और वचनों की मर्यादा दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी मिलती है। इसी संदेश के साथ कौमी सेवक रामलीला कमेटी की ओर से श्री हनुमानगढ़ी मंदिर में आयोजित रामलीला की चौथी नाईट ‘राम वनवास’ का मंचन किया गया।
कमेटी के चेयरमैन बलदेव राज शर्मा और प्रधान इंद्रजीत करवल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवक पवन कुमार कालड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित लोगों को शारदीय नवरात्रों की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री रामलीला के मंचन का उद्देश्य नई पीढ़ी को सदाचार, संस्कार और नैतिक जिम्मेदारी का महत्व समझाना है।
पवन कुमार कालड़ा ने कहा कि रामायण का मूल संदेश कर्तव्य का निर्वाह करना, मर्यादित जीवन जीना और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आज भी समाज को सही आचरण और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
कैकेयी के दो वरदानों से बदली अयोध्या की कहानी
कार्यक्रम का उद्घाटन अभिषेक खुराना, विष्णु शुक्ला, मोहित और पांडे पंडित ने संयुक्त रूप से रिबन काटकर किया। इसके बाद मंच पर राम वनवास का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
मंचन में दिखाया गया कि राजा दशरथ अपने ज्येष्ठ पुत्र श्रीराम को युवराज घोषित करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन दासी मंथरा के बहकावे में आकर महारानी कैकेयी राजा दशरथ से दो वरदान मांगती हैं। इनमें भरत का राजतिलक और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास शामिल होता है।
इसके बाद माता सीता और लक्ष्मण भी श्रीराम के साथ वन जाने का निर्णय लेते हैं। महामंत्री सुमंत भारी मन से अपने रथ पर तीनों को अयोध्या की सीमा से बाहर वन में छोड़ आते हैं। इस भावनात्मक प्रसंग ने दर्शकों के सामने त्याग, वचनबद्धता और पारिवारिक संबंधों की संवेदनशीलता को प्रस्तुत किया।
धार्मिक मंचन के साथ संस्कारों का संदेश
कार्यक्रम का मंच संचालन लेक्चरार हरजिंदर गोगना ने प्रभावशाली ढंग से किया। इस अवसर पर प्रोजेक्शन डायरेक्टर रविंद्र कुमार नीटा एडवोकेट, सरपरस्त कृष्ण बजाज, कीमती लाल शर्मा, वेद प्रकाश तनेजा, गुरदीप सैनी, सीनियर वाइस प्रधान लक्ष्मण दास सुमन, अवतार पम्मा, विक्रम शर्मा, वाइस प्रधान पंकज चावला, साहिल भार्गो, मनोज शर्मा, निर्देशक किशोर हीर, नरिंदर निंदी, शमशेर सिंह, महासचिव राजेश शर्मा, कैशियर रमन शर्मा, सचिव एवं स्टोर इंचार्ज अशोक कुमार, दविंदर बब्बी, संगठन मंत्री महेश कनौजिया, रामपाल सुमन, स्टेज सचिव हरजिंदर गोगना तथा स्टेज एवं स्क्रीनिंग से जुड़े बलजीत सुमन, सुरिंदर सुमन, राम सिंह, राजकुमार राजू, चरणजीत चन्ना, निशांत शर्मा, मनोज टंडन, रोहित गुप्ता, अमित सुमन, पारस भारद्वाज, चंदर कनोजिया और शारू कनोजिया सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। संदेश: राम वनवास का प्रसंग याद दिलाता है कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आने पर भी कर्तव्य, नैतिकता और मर्यादा का महत्व कम नहीं होता। रामलीला की सार्थकता तभी है, जब मंच से मिलने वाली सीख परिवार और समाज के व्यवहार में भी दिखाई दे।
संदेश: राम वनवास का प्रसंग याद दिलाता है कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आने पर भी कर्तव्य, नैतिकता और मर्यादा का महत्व कम नहीं होता। रामलीला की सार्थकता तभी है, जब मंच से मिलने वाली सीख परिवार और समाज के व्यवहार में भी दिखाई दे।
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