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🔴 यहाँ क्लिक करके D-News Watch के मुख्य पृष्ठ (Home) पर जाएँविद्यार्थियों ने हस्तनिर्मित वस्तुओं, सजावटी सामान और व्यंजनों के स्टॉल लगाकर दिखाई प्रतिभा; स्कूल प्रबंधन ने की सराहना
फगवाड़ा: शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है। इसी सोच के साथ श्री महावीर जैन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, होशियारपुर रोड, फगवाड़ा में उद्यमिता प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। विषय प्रभारी रोमिका शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपने हाथों से तैयार की गई वस्तुओं के स्टॉल लगाकर रचनात्मकता, कौशल और उद्यमशीलता का प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनी में हस्तकला के आकर्षक नमूनों, घरेलू उपयोग की वस्तुओं, सजावटी सामान और स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और मेहनत से तैयार उत्पादों के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर उनकी रचनात्मक प्रतिभा स्वरोजगार का आधार भी बन सकती है। उपस्थित लोगों ने बच्चों की मेहनत और हुनर की सराहना की।
विद्यालय के प्राचार्य सरदार जगपाल सिंह ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं में रुचि दिखाई और बच्चों के साथ अध्यापक वर्ग को उनके उत्पाद खरीदकर प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के नन्हे हाथों का हुनर और उनकी मेहनत देखकर उन्हें खुशी हुई है। ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे व्यावहारिक रूप देने का अवसर प्रदान करते हैं।
उद्यमिता की शिक्षा से आत्मनिर्भरता को मिलता है बढ़ावा : सतीश जैन
स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान सतीश जैन ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में शिक्षा को किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। विद्यार्थियों को जीवन में अपने पैरों पर खड़ा होने और रोजगार के अवसर तलाशने के लिए भी तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उद्यमिता की शिक्षा विद्यार्थियों को नए विचारों को वास्तविक रूप देने, उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा कक्षा 11वीं और 12वीं के पाठ्यक्रम में उद्यमिता विषय को शामिल करना भी इसी दिशा में एक सराहनीय कदम है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को कारोबार की बुनियादी समझ, योजना बनाने और रचनात्मक सोच विकसित करने का अवसर मिलता है।
समिति के सचिव ललित जैन और कोषाध्यक्ष अजीत जैन ने भी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां बच्चों में मेहनत, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित करती हैं। विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई वस्तुएं केवल उनके कला-कौशल का प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि भविष्य में स्वरोजगार और उद्यमिता की संभावनाओं की झलक भी प्रस्तुत करती हैं।
स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों और अध्यापकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी तथा बच्चों को भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ नई गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
जनता का सवाल: क्या स्कूलों में उद्यमिता जैसी व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों को भविष्य में नौकरी तलाशने के साथ-साथ अपना रोजगार शुरू करने के लिए भी तैयार किया जा सकता है? ऐसी प्रदर्शनियां इस दिशा में एक उपयोगी पहल हो सकती हैं।
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