फगवाड़ा मौसम ➔ SENSEX/NIFTY: ▲ लाइव ➔ USD/INR ➔ आज का पंचांग ➔

हवाई सफर में सुरक्षा का नया फॉर्मूला—पायलट अगर ‘हाई’ है तो यात्री क्यों पीछे रहें?

D-News Watch | व्यंग्य

हवाई जहाज में बैठते ही एयर होस्टेस की आवाज गूंजती है—“कृपया अपनी सीट बेल्ट बांध लें।”
लेकिन अब लगता है कि विमानन सुरक्षा के इस पुराने फॉर्मूले में थोड़ा बदलाव जरूरी है।
नई घोषणा कुछ ऐसी होनी चाहिए—

“यात्रियों से अनुरोध है कि सीट बेल्ट बांधने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि कॉकपिट में सब कुछ सामान्य है। और अगर पायलट साहब ‘हाई’ मूड में हों, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आप भी थोड़ा गांजा सेवन कर लीजिए, ताकि पायलट और यात्री दोनों एक ही मूड में रहें!”

आखिर बराबरी का जमाना है भाई!
अब अगर पायलट गांजा पीकर विमान उड़ाने के आरोप में चर्चा में आ सकता है, तो यात्री बेचारा पीछे क्यों रहे? उसने भी तो टिकट के पूरे पैसे दिए हैं। उसे भी उड़ान का पूरा अनुभव मिलना चाहिए।
हो सकता है एयरलाइंस भविष्य में टिकट के साथ एक नया विकल्प देने लगें—

“सिर्फ यात्रा”
या
“यात्रा के साथ गांजा वाला अनुभव!”

पहले विकल्प में यात्री सामान्य तरीके से बैठेगा, सीट बेल्ट लगाएगा और दिल्ली पहुंचेगा।
दूसरे विकल्प में घोषणा होगी—

“देवियो और सज्जनो, कृपया अपनी सीट बेल्ट बांध लें… और अगर पायलट साहब आज कुछ ज्यादा ‘हाई’ हैं तो आप भी गांजा सेवन करके उड़ान को यादगार बनाएं।”

फिर विमान अचानक 300 फीट नीचे आ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं।
सामने बैठे यात्री से कहिए—

“भाई साहब, लगता है पायलट साहब नीचे नहीं जा रहे… स्वर्ग का रास्ता ढूंढ रहे हैं!”

और अगर कोई बच्चा घबराकर पापा से पूछे—
“पापा, प्लेन नीचे क्यों आ गया?”
तो पापा उसे समझाएं—
“बेटा, पायलट अंकल शायद ऊपर जाने का रास्ता तलाश रहे हैं। अगर विमान बहुत नीचे आ गया तो चिंता मत करना… हो सकता है अगली बार उन्हें ऊपर जाने का रास्ता मिल जाए!”

और अगर पायलट साहब का ‘हाई’ होने का उत्साह कुछ ज्यादा ही बढ़ जाए, तो यात्री के मन में एक और डर पैदा हो सकता है—

“कहीं साहब इतना ऊपर उड़ने की कोशिश न कर दें कि लौटने के लिए धरती का रास्ता ही न बचे!”
यानी यात्री टिकट लेकर दिल्ली जाने निकला था और कॉकपिट में बैठे साहब यमलोक का शॉर्टकट खोजने निकल पड़े!

ऐसे में एयरलाइन की अगली सुरक्षा घोषणा शायद यही होनी चाहिए—

“देवियो और सज्जनो, कृपया अपनी सीट बेल्ट कसकर बांध लें। हमारे पायलट साहब इस समय उड़ान नहीं, बल्कि स्वर्ग की सैर करवाने को उत्सुक हैं। असुविधा के लिए हमें खेद है।”

और यात्री मन ही मन बस इतना कहे—

“हे राम! टिकट तो दिल्ली का लिया था… ये स्वर्ग का बोर्डिंग पास कब कट गया?”

और अगर विमान सुरक्षित पहुंच गया तो यात्री एयरलाइन को धन्यवाद देने के बजाय पायलट से पूछे—

“सर, आज गांजा नहीं मिला था क्या?”😂

लेकिन, मजाक अपनी जगह और सवाल अपनी जगह।
सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी पायलट की शारीरिक और मानसिक फिटनेस पर निर्भर करती है। इसलिए किसी पायलट के ड्रग टेस्ट में marijuana की पुष्टि होना गंभीर विषय है। यह जांच अलग बात है कि सेवन कब हुआ और क्या उड़ान के समय उसका कोई प्रभाव था, लेकिन सवाल यह जरूर है कि पायलटों की प्री-फ्लाइट स्क्रीनिंग, ड्रग टेस्टिंग और फिटनेस मॉनिटरिंग कितनी कड़ी और प्रभावी है।
क्योंकि यात्री विमान में मनोरंजन के लिए झटके नहीं खाता।
वह सुरक्षित पहुंचने के लिए टिकट खरीदता है।
इसलिए आसमान में विमान ‘हाई’ होना चाहिए—पायलट नहीं।

“डिस्क्लेमर: यहां ‘गांजा’ सिर्फ व्यंग्य का पात्र है, प्रचार का नहीं। मकसद नशे को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर व्यंग्यात्मक चोट करना है जिसकी छोटी-सी चूक सैकड़ों जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।”

Discover more from D-News Watch

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *