‘अंधेरे से उजाले की ओर’ मिशन के तहत लोगों को नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए किया प्रेरित
फगवाड़ा। डॉ. राजन आई केयर अस्पताल, फगवाड़ा में ‘अंधेरे से उजाले की ओर’ मिशन के तहत 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े की शुरुआत की गई। इस दौरान लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए अधिक से अधिक लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की गई।
मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे तक दान की जा सकती हैं आंखें
अस्पताल के एम.डी. डॉ. एस. राजन ने बताया कि भारत में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हर वर्ष 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी आंखें 6 से 8 घंटे तक दान के लिए योग्य रहती हैं। यदि इस अवधि के दौरान आंखें आई बैंक को दान कर दी जाएं तो दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए रक्त समूह का मिलान होना जरूरी नहीं होता। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की।
एक लाख से अधिक लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प
मिशन कॉर्नियल ब्लाइंडनेस फ्री वर्ल्ड के इंटरनेशनल कोऑर्डिनेटर अशोक मेहरा ने बताया कि वह अपनी टीम के साथ लंबे समय से लोगों को नेत्रदान अभियान से जोड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता काफी बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि उनकी टीम द्वारा अब तक एक लाख से अधिक लोगों को नेत्रदान का संकल्प दिलाया जा चुका है, जबकि करीब 8 हजार नेत्रदान करवाए गए हैं।
देश में करीब 11 लाख लोग कॉर्निया की बीमारी के कारण नेत्रहीन
अशोक मेहरा ने बताया कि इसके बावजूद देश में अभी भी करीब 11 लाख लोग कॉर्निया संबंधी बीमारी के कारण नेत्रहीन हैं। हर वर्ष लगभग 25 हजार नए मरीज इस संख्या में जुड़ रहे हैं। इनमें से बहुत से मरीजों का उपचार दान की गई आंखों से ही संभव है।
उन्होंने बताया कि देश में नेत्रदान की वार्षिक संख्या अभी भी करीब 50 से 60 हजार के आसपास है। ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति को नेत्रदान के प्रति जागरूक होने की जरूरत है।
एक साल के बच्चे से 80-90 साल तक की उम्र में भी संभव है नेत्रदान
प्रसिद्ध समाजसेवी एवं ब्लड बैंक फगवाड़ा के अध्यक्ष मलकीत सिंह रघबोत्रा ने भी लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक वर्ष के बच्चे से लेकर 80-90 वर्ष की आयु के बुजुर्ग तक की आंखें मृत्यु के बाद दान की जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान एक ऐसा महान कार्य है, जिसके माध्यम से व्यक्ति मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी ला सकता है।
आई बैंक की टीम घर से ही प्राप्त कर लेती है आंखें
समाजसेवी एवं नेत्रदान आई बैंक कोऑर्डिनेटर रमन नेहरा ने बताया कि किसी परिवार के सदस्य या रिश्तेदार की मृत्यु होने के बाद आई बैंक की मेडिकल टीम घर पहुंचकर वहीं से आंखें प्राप्त कर लेती है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 20 मिनट का समय लगता है।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों की आंखों पर चश्मा लगा हो या आंखों का ऑपरेशन हुआ हो, वे भी नेत्रदान का संकल्प ले सकते हैं।
विद्यार्थियों के लिए पोस्टर प्रतियोगिता और नेत्रदानी परिवारों का सम्मान
अशोक मेहरा ने बताया कि नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े के दौरान राजन आई केयर अस्पताल के सहयोग से स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘आंखें दान—महादान’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी।
इसके अलावा फगवाड़ा के नेत्रदानी परिवारों के लिए विशेष सम्मान समारोह का आयोजन भी किया जाएगा।
अस्पताल में बनवाया जा सकता है आई डोनर कार्ड
डॉ. राजन ने बताया कि नेत्रदान का संकल्प लेने के इच्छुक लोग राजन आई केयर अस्पताल, फगवाड़ा में अपना नेत्रदान संकल्प दर्ज करवाकर आई डोनर कार्ड बनवा सकते हैं।
इस अवसर पर राहुल बंगा सहित अस्पताल का स्टाफ भी उपस्थित था।
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