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तस्वीर: श्री महावीर जैन मॉडल सी.सै. स्कूल में आयोजित दशहरा उत्सव को समर्पित कार्यक्रम के दृश्य।

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फगवाड़ा, 19 अक्टूबर : स्थानीय होशियारपुर रोड स्थित श्री महावीर जैन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रांगण में विजयदशमी पर्व के उपलक्ष्य में स्कूल प्रिंसिपल सरदार जगपाल सिंह के नेतृत्व में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक इस पर्व को समर्पित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कविताओं, भजनों, मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों और रामायण पर आधारित आकर्षक झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पावन जीवन चरित्र पर आधारित प्रस्तुतियों ने विद्यालय के स्टाफ और विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। नृत्य वाटिका के माध्यम से रामचरित्र का सुंदर मंचन किया गया, जिसमें भगवान श्रीराम को भारतीय संस्कृति और आदर्श जीवन मूल्यों के महानायक के रूप में प्रस्तुत किया गया। वहीं, विद्यार्थियों ने रामायण के विभिन्न पात्रों का रूप धारण कर आकर्षक झांकियों के माध्यम से इन प्रसंगों को जीवंत कर दिया। पूरे कार्यक्रम में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

विद्यालय के प्रिंसिपल सरदार जगपाल सिंह ने विद्यार्थियों को विजयदशमी पर्व के महत्व से अवगत करवाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का मर्यादित एवं आदर्श जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके जीवन से हमें सत्य, धर्म, संयम और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने की सीख मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमें कभी अधीर या हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। सत्य की सदैव जीत होती है और जो व्यक्ति धर्म तथा नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलता है, वह अंततः सफलता प्राप्त करता है।

इस अवसर पर स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान सतीश जैन, सचिव ललित जैन और कोषाध्यक्ष अजीत जैन ने विद्यार्थियों तथा समस्त स्टाफ को विजयदशमी पर्व की शुभकामनाएं दीं। प्रधान सतीश जैन ने कहा कि भगवान श्रीराम के पावन जीवन चरित्र से प्रेरणा लेकर हमें सदैव सत्य और धर्म के पक्ष में खड़े रहना चाहिए। तभी समाज में आदर्श व्यवस्था स्थापित करने और रामराज्य की कल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि दशहरा हमें अहंकार जैसे दुर्गुणों से दूर रहने की भी सीख देता है। रावण चारों वेदों का ज्ञाता और महान विद्वान होने के बावजूद अपने अहंकार के कारण अपना पराक्रम, सम्मान और परिवार तक गंवा बैठा। उसका अंत इस बात का प्रतीक है कि ज्ञान और शक्ति होने के बावजूद यदि व्यक्ति अहंकार के वश में हो जाए, तो उसका पतन निश्चित है।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि सच्चा ज्ञान वही है, जो व्यक्ति को विनम्र बनाए और उसे सत्य, सदाचार तथा मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे। विजयदशमी का पर्व हमें हर परिस्थिति में अच्छाई का साथ देने और बुराइयों का त्याग करने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।


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