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🔴 यहाँ क्लिक करके D-News Watch के मुख्य पृष्ठ (Home) पर जाएँहरियाणा में 3200 और दिल्ली में मिलते हैं 2500 रु. प्रति महीना
पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और पेंशन दरों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में महिलाओं के खातों में सीधे तीन-तीन महीने की एकमुश्त सहायता राशि जारी करने के बाद, अब राज्य के राजनीतिक हलकों और विपक्ष द्वारा वृद्धों, विधवाओं तथा दिव्यांगों की मासिक पेंशन को बढ़ाकर 2500 रुपये प्रति माह करने की मांग उठना स्वभाविक है।
हाल के महीनों में सरकार ने राज्य की महिलाओं को वित्तीय राहत देने की दिशा में कदम उठाते हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए खातों में धनराशि भेजी है। यदि इसके वितरण के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह के हिसाब से तीन महीने की एकमुश्त राशि यानी कुल 4500 रुपये मिले हैं। वहीं, सामान्य वर्ग की पात्र महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह के हिसाब से तीन महीने के 3000 रुपये जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त जो महिलाएं पहले से किसी न किसी पेंशन योजना के दायरे में आती थीं, उन्हें नियमित पेंशन के साथ अतिरिक्त वित्तीय लाभ जोड़कर लगभग 1500 रुपये की मासिक सहायता प्राप्त हुई है।
इस अंतरिम वित्तीय मदद के बाद अब मुख्य ध्यान राज्य की नियमित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं पर टिक गया है। वर्तमान समय में पंजाब में वृद्धावस्था, विधवा और आश्रित पेंशन की दर 1500 रुपये प्रति माह तय है, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि बढ़ाकर 3200 रुपये प्रति माह कर दी गई है। बल्कि 45 वर्ष से अधिक आयु वाले अविवाहित पुरुष भी पेंशन पाने के हकदार हैं। वहीं दिल्ली में पेंशनधारकों को 2500 रुपये प्रति माह मिलते हैं और 70 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए यह पेंशन राशि 3000 रुपये प्रति माह है।
पड़ोसी राज्यों की तुलना में पंजाब की पेंशन दरें कम होने के कारण राज्य के पेंशनधारक मुख्यतः दिव्यांग जन और बुजुर्ग वर्ग अब सरकार से बड़ी अपेक्षाएं लगाए बैठा है। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में 1500 रुपये की राशि दवा-पानी और दैनिक जरूरतों के लिए नाकाफी साबित हो रही है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में विपक्ष भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पड़ोसी राज्यों की पेंशन दरों का यह अंतर आने वाले समय में एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी बन सकता है।
हालांकि, प्रशासनिक और आर्थिक जानकारों का मानना है कि पेंशन दर में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का फैसला पूरी तरह राज्य के वित्तीय संतुलन पर निर्भर करता है। पंजाब पर पहले से ही भारी ऋण, राज्य बजट और वित्तीय संसाधनों का दबाव है। ऐसे में यदि सरकार विपक्ष और जनता की इस मांग पर विचार करती है, तो इससे राज्य के बजट पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
फिलहाल, 2500 रुपये पेंशन किए जाने को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। लेकिन जिस तरह से पड़ोसी राज्यों के पेंशन आंकड़ों को लेकर राज्य में जनचर्चा है, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक निर्णयों के केंद्र में रहने वाला है।
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