
फगवाड़ा। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवकुमार सैनी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक हैं और उनके नाम पर होने वाला किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार अक्षम्य अपराध है।
शिवकुमार सैनी ने कहा कि श्रीराम मंदिर का निर्माण केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की वर्षों की तपस्या, संघर्ष और आस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण आंदोलन के दौरान हजारों की संख्या में स्वयंसेवकों ने अपना बलिदान दिया था। आज यदि मंदिर से जुड़े धन, चढ़ावे अथवा अन्य मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते हैं तो उन बलिदानियों के त्याग और समर्पण को गहरी ठेस पहुंचती है। यह पूरे रामभक्त समाज की भावनाओं को आहत करने वाला विषय है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्रीराम के चरणों में अर्पित किया गया प्रत्येक रुपया और चढ़ावा पूरी निष्ठा और विश्वास का प्रतीक होता है। यदि कोई व्यक्ति उस धन का दुरुपयोग करता है तो वह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि धार्मिक आस्था के साथ विश्वासघात भी करता है। ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार का दुस्साहस न कर सके।
प्रदेश उपाध्यक्ष ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि देशभर के श्रद्धालुओं के मन में किसी प्रकार का संशय न रहे। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी बड़े अधिकारी, ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। किसी भी पद या प्रभाव के आधार पर किसी को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
शिवकुमार सैनी ने कहा कि राष्ट्रीय बजरंग दल हमेशा से सनातन धर्म, मंदिरों की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों से अपील की कि मामले का शीघ्र निष्पादन कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए, ताकि करोड़ों रामभक्तों का विश्वास और मंदिर की पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि धर्मस्थलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है, जिससे भविष्य में इस प्रकार के विवादों की पुनरावृत्ति न हो सके।
